द्विघात समीकरण
1. द्विघात समीकरण क्या है ?
- जिस समीकरण में एक चर हो और उस चर की अधिकतम घात 2 हो, उसे द्विघात समीकरण कहते हैं।
- “Quadratic” शब्द लैटिन भाषा के Quadratus से लिया गया है, जिसका अर्थ वर्ग होता है।
- द्विघात समीकरणों का उपयोग गणित, भौतिकी, ज्यामिति और दैनिक जीवन की समस्याओं में होता है।
2. द्विघात समीकरण का मानक रूप
- किसी द्विघात समीकरण का मानक रूप होता है:
ax2 + bx + c = 0
जहाँ—
- a, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं
- a ≠ 0 होना आवश्यक है
- यदि a = 0 हो, तो समीकरण रेखीय (Linear) हो जाएगा, द्विघात नहीं
3. द्विघात समीकरण के उदाहरण
- x² + 7x + 10 = 0
- 2x² − 5x − 3 = 0
- x² − 9 = 0
- (x − 4)(x + 1) = 0
द्विघात नहीं हैं
- 5x + 2 = 0
- x³ − x + 1 = 0
4. द्विघात समीकरण के मूल (Roots)
- द्विघात समीकरण के हल को उसके मूल (Roots) कहते हैं।
- मूल वे मान हैं जिनके लिए समीकरण संतुष्ट होता है।
- एक द्विघात समीकरण के अधिकतम दो मूल हो सकते हैं।
5. द्विघात समीकरण हल करने की विधियाँ (NCERT)
NCERT के अनुसार द्विघात समीकरण हल करने की तीन विधियाँ हैं:
(A) गुणनखंड विधि (Factorisation Method)
- समीकरण को दो रैखिक गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखा जाता है।
- प्रत्येक गुणनखंड को शून्य के बराबर रखकर हल निकाला जाता है।
चरण:
- समीकरण को मानक रूप में लिखें
- मध्य पद का गुणनखंड करें
- प्रत्येक गुणनखंड को शून्य के बराबर रखें
- x के मान ज्ञात करें
(B) पूर्ण वर्ग विधि (Completing the Square Method)
- समीकरण को पूर्ण वर्ग के रूप में बदला जाता है।
- तब उपयोगी जब गुणनखंड संभव न हो।
चरण:
- यदि x² का गुणांक 1 न हो, तो उससे भाग दें
- स्थिर पद को RHS में ले जाएँ
- x के गुणांक के आधे का वर्ग दोनों पक्षों में जोड़ें
- प्राप्त समीकरण हल करें
(C) द्विघात सूत्र विधि (Quadratic Formula Method)
- यह सर्वाधिक सामान्य विधि है।
- किसी भी द्विघात समीकरण के लिए प्रयुक्त की जा सकती है।
द्विघात सूत्र:

6. विविक्तकर (Discriminant)
- व्यंजक b² − 4ac को विविक्तक कहते हैं।
- इसे D से दर्शाते हैं।
D = b2 – 4ac
7. विविक्तकर के आधार पर मूलों की प्रकृति(Nature of roots)
| विविक्तक (D) | मूलों की प्रकृति |
|---|---|
| D > 0 | दो भिन्न वास्तविक मूल |
| D = 0 | दो समान वास्तविक मूल |
| D < 0 | कोई वास्तविक मूल नहीं |
8. द्विघात समीकरण का ज्यामितीय अर्थ
- द्विघात समीकरण का ग्राफ परवलय (Parabola) होता है।
- मूल वे बिंदु हैं जहाँ परवलय x-अक्ष को काटता या स्पर्श करता है।
- दो बिंदुओं पर काटे → दो वास्तविक मूल
- एक बिंदु पर स्पर्श करे → समान मूल
- x-अक्ष को न काटे → कोई वास्तविक मूल नहीं
9. द्विघात समीकरण का हल
- किसी द्विघात समीकरण के:
- दो वास्तविक हल हो सकते हैं
- एक वास्तविक हल (दोहरा) हो सकता है
- कोई वास्तविक हल नहीं भी हो सकता
10. द्विघात समीकरण के अनुप्रयोग
द्विघात समीकरणों का उपयोग किया जाता है:
- क्षेत्रफल व परिमाप संबंधी प्रश्नों में
- चाल, समय और दूरी की समस्याओं में
- आयु संबंधी प्रश्नों में
- संख्याओं के योग व गुणनफल में
- ज्यामितीय समस्याओं में
11. NCERT के महत्वपूर्ण बिंदु
- मानक रूप: ax² + bx + c = 0
- a ≠ 0 अनिवार्य है
- विविक्तक मूलों की प्रकृति बताता है
- द्विघात सूत्र सभी समीकरणों पर लागू होता है
- ग्राफ हमेशा परवलय होता है
12. महत्वपूर्ण सूत्र
- द्विघात सूत्र:

- विविक्तक:
D = b2 – 4ac
13. सामान्य गलतियाँ
- a का मान शून्य मान लेना
- विविक्तक की गलत गणना
- चिह्नों (+/−) में गलती
- गलत गुणनखंड करना
14. त्वरित पुनरावृत्ति
- घात = 2
- अधिकतम मूल = 2
- विविक्तक से मूलों की प्रकृति ज्ञात
- परवलय ग्राफ
- बोर्ड परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय


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