विलयन (Solutions) – कक्षा 12 रसायन विज्ञान नोट्स

विलयन (Solutions)

विलयन (Solutions) कक्षा 12 रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में हम विलयन की सांद्रता, वाष्प दाब, राउल्ट का नियम, हेनरी का नियम, सहलग्न गुणधर्म (Colligative Properties), परासरण दाब और वान्ट हॉफ गुणक जैसे महत्वपूर्ण concepts का अध्ययन करते हैं।

इस अध्याय में केवल सूत्र याद करना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी आवश्यक है कि विलेय (solute) के कणों की संख्या में परिवर्तन होने पर विलयन के गुणधर्म किस प्रकार बदलते हैं।

ये नोट्स कक्षा 12 के विद्यार्थियों को concept समझने, numerical हल करने, बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने तथा NEET/JEE के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं को revise करने में सहायता करेंगे।


1. विलयन क्या है?

विलयन (Solution) दो या दो से अधिक घटकों का एक समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture) है।

उदाहरण:

  • नमक + जल → नमक का विलयन
  • चीनी + जल → चीनी का विलयन
  • एथेनॉल + जल → एथेनॉल-जल विलयन
  • वायु → गैसीय विलयन

समांगी मिश्रण का अर्थ है कि मिश्रण के प्रत्येक भाग में संघटन समान होता है।

विलयन के घटक

एक विलयन में सामान्यतः दो प्रकार के घटक होते हैं:

  1. विलायक (Solvent)
  2. विलेय (Solute)

सामान्यतः अधिक मात्रा में उपस्थित घटक को विलायक और कम मात्रा में उपस्थित घटक को विलेय कहा जाता है।

उदाहरण के लिए, नमक के जलीय विलयन में:

  • जल → विलायक
  • NaCl → विलेय

महत्वपूर्ण बिंदु

विशेष परिस्थितियों में केवल मात्रा के आधार पर विलायक की पहचान नहीं की जाती। सामान्यतः वह घटक जो विलयन की भौतिक अवस्था निर्धारित करता है, विलायक माना जाता है।


2. विलयनों के प्रकार

विलयन विभिन्न भौतिक अवस्थाओं में पाए जा सकते हैं।

विलेयविलायकउदाहरण
गैसगैसवायु
गैसद्रवजल में CO₂
द्रवद्रवजल में एथेनॉल
ठोसद्रवजल में NaCl
ठोसठोसमिश्रधातु जैसे पीतल

विलयन के गुणधर्म उसके घटकों की प्रकृति और उनकी मात्रा पर निर्भर करते हैं।


3. विलयन की सांद्रता

सांद्रता (Concentration) यह बताती है कि किसी निश्चित मात्रा के विलयन या विलायक में कितना विलेय उपस्थित है।

कक्षा 12 में सांद्रता व्यक्त करने की प्रमुख विधियाँ हैं:

  • द्रव्यमान प्रतिशत
  • आयतन प्रतिशत
  • द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत
  • पार्ट्स पर मिलियन (ppm)
  • मोल प्रभाज (Mole Fraction)
  • मोलरता (Molarity)
  • मोललता (Molality)

4. द्रव्यमान प्रतिशत

द्रव्यमान प्रतिशत का सूत्र है:

द्रव्यमान % = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100

जहाँ:

विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान

उदाहरण

यदि 90 g जल में 10 g NaCl घोला गया है:

विलयन का द्रव्यमान:

10 + 90 = 100 g

अतः,

द्रव्यमान % = (10/100) × 100

= 10%

अर्थात यह 10% द्रव्यमान द्वारा NaCl का विलयन है।


5. आयतन प्रतिशत

द्रवों के विलयन के लिए आयतन प्रतिशत इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

आयतन % = (विलेय का आयतन / विलयन का आयतन) × 100

उदाहरण के लिए, 20% एथेनॉल का विलयन आयतन द्वारा यह दर्शाता है कि 100 mL विलयन में 20 mL एथेनॉल उपस्थित है।

महत्वपूर्ण

इन दोनों को आपस में confuse न करें:

द्रव्यमान % ≠ आयतन %

दोनों में प्रयुक्त राशियाँ अलग-अलग होती हैं।


6. द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत

इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:

द्रव्यमान/आयतन % = (विलेय का द्रव्यमान g में / विलयन का आयतन mL में) × 100

उदाहरण:

5% (m/v) ग्लूकोज विलयन का अर्थ है:

100 mL विलयन में 5 g ग्लूकोज उपस्थित है।


7. पार्ट्स पर मिलियन (ppm)

जब विलेय की सांद्रता बहुत कम होती है, तब पार्ट्स पर मिलियन (parts per million, ppm) का प्रयोग किया जाता है।

द्रव्यमान के आधार पर:

ppm = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 10⁶

ppm का प्रयोग बहुत कम मात्रा में उपस्थित पदार्थों के लिए किया जाता है, जैसे:

  • प्रदूषक
  • जल में अशुद्धियाँ
  • पीने के जल में फ्लोराइड
  • वायुमंडलीय प्रदूषक

उदाहरण

यदि 1 mg पदार्थ, 1 kg जल में उपस्थित है:

1 kg = 10⁶ mg

अतः:

सांद्रता = 1 ppm


8. मोल प्रभाज

मोल प्रभाज (Mole Fraction) किसी घटक के मोलों की संख्या और विलयन में उपस्थित सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या का अनुपात है।

यदि विलयन में A और B दो घटक हैं:

xA = nA / (nA + nB)

और

xB = nB / (nA + nB)

अतः:

xA + xB = 1

महत्वपूर्ण बिंदु

मोल प्रभाज की कोई इकाई नहीं होती।

यह बोर्ड परीक्षा और numerical questions के लिए महत्वपूर्ण तथ्य है।


9. मोलरता

मोलरता (Molarity) एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या है।

M = विलेय के मोलों की संख्या / विलयन का आयतन लीटर में

या

M = n/V

इकाई:

mol L⁻¹ या M

उदाहरण

यदि 2 L विलयन में 0.5 mol NaOH उपस्थित है:

M = 0.5/2

M = 0.25 M

महत्वपूर्ण बिंदु

मोलरता विलयन के आयतन पर निर्भर करती है।

तापमान बदलने पर आयतन बदल सकता है। इसलिए:

मोलरता तापमान पर निर्भर करती है।


10. मोललता

मोललता (Molality) 1 kg विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या है।

m = विलेय के मोलों की संख्या / विलायक का द्रव्यमान kg में

उदाहरण

यदि 2 kg जल में 0.5 mol ग्लूकोज घोला गया है:

m = 0.5/2

m = 0.25 mol kg⁻¹

महत्वपूर्ण बिंदु

मोललता विलायक के द्रव्यमान पर निर्भर करती है। सामान्य परिस्थितियों में द्रव्यमान तापमान के साथ नहीं बदलता।

इसलिए:

मोललता तापमान से स्वतंत्र होती है।


11. मोलरता और मोललता में अंतर

मोलरतामोललता
विलेय के मोल / लीटर विलयनविलेय के मोल / kg विलायक
विलयन के आयतन पर आधारितविलायक के द्रव्यमान पर आधारित
इकाई: mol L⁻¹इकाई: mol kg⁻¹
तापमान पर निर्भरतापमान से लगभग स्वतंत्र
संकेत: Mसंकेत: m

याद रखने की आसान विधि

Molarity → Litre of solution

Molality → kg of solvent

अर्थात:

मोलरता → विलयन का लीटर

मोललता → विलायक का kg


12. विलेयता

विलेयता (Solubility) किसी निश्चित तापमान और दाब पर संतृप्त विलयन बनाने के लिए दिए गए विलायक की निश्चित मात्रा में घुल सकने वाले विलेय की अधिकतम मात्रा है।

विलेयता निम्न कारकों पर निर्भर करती है:

  • विलेय की प्रकृति
  • विलायक की प्रकृति
  • तापमान
  • गैसों के लिए दाब

13. द्रवों में ठोसों की विलेयता

किसी ठोस की द्रव में विलेयता सामान्यतः तापमान से प्रभावित होती है।

बहुत से ठोसों के लिए:

तापमान बढ़ने पर विलेयता बढ़ती है।

लेकिन यह सभी पदार्थों के लिए सार्वभौमिक नियम नहीं है।

विलेयता में परिवर्तन इस बात पर निर्भर करता है कि घुलने की प्रक्रिया:

  • ऊष्माशोषी है या
  • ऊष्माक्षेपी है।

महत्वपूर्ण अवधारणा

यदि घुलने की प्रक्रिया में ऊष्मा अवशोषित होती है:

तापमान बढ़ाना → सामान्यतः विलेयता बढ़ाता है।

यदि घुलने की प्रक्रिया में ऊष्मा निकलती है:

तापमान बढ़ाना → विलेयता घटा सकता है।

इसलिए प्रत्येक ठोस के लिए केवल यह याद करना सही नहीं है कि तापमान बढ़ने पर विलेयता हमेशा बढ़ती है।


14. द्रवों में गैसों की विलेयता

द्रव में गैस की विलेयता मुख्य रूप से निम्न पर निर्भर करती है:

  • दाब
  • तापमान
  • गैस और विलायक की प्रकृति

सामान्यतः:

दाब बढ़ने पर गैस की विलेयता बढ़ती है।

जबकि सामान्यतः:

तापमान बढ़ने पर गैसों की द्रव में विलेयता घटती है।

इसी कारण ठंडे carbonated drinks में CO₂ अपेक्षाकृत अधिक घुली रहती है।


15. हेनरी का नियम

हेनरी का नियम (Henry’s Law) गैस के दाब और द्रव में उसकी विलेयता के बीच संबंध बताता है।

इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है:

p = KH x

जहाँ:

  • p = गैस का आंशिक दाब
  • x = द्रव में घुली गैस का मोल प्रभाज
  • KH = हेनरी नियम स्थिरांक

अतः:

x = p/KH

निश्चित तापमान पर गैस का दाब बढ़ाने से सामान्यतः द्रव में गैस की विलेयता बढ़ती है।

महत्वपूर्ण बिंदु

समीकरण:

p = KH x

से स्पष्ट है कि समान दाब पर KH का अधिक मान गैस की कम विलेयता को दर्शाता है।

अर्थात:

KH अधिक → गैस की विलेयता कम

हेनरी के नियम के अनुप्रयोग

हेनरी के नियम से निम्न घटनाओं को समझने में सहायता मिलती है:

  • शीतल पेय पदार्थों में CO₂ का घुलना
  • जल में ऑक्सीजन का घुलना
  • गहरे समुद्र में diving
  • अधिक ऊँचाई पर गैसों के प्रभाव
  • जैविक तंत्रों में गैसों की विलेयता

16. गहरे पानी में गोताखोरों को समस्या क्यों होती है?

समुद्र की अधिक गहराई पर दाब बहुत अधिक होता है।

अधिक दाब के कारण रक्त में अधिक मात्रा में नाइट्रोजन घुल सकती है।

यदि गोताखोर अचानक सतह पर आता है, तो दाब तेजी से कम होता है। इसके कारण घुली हुई गैस बुलबुलों के रूप में बाहर आ सकती है।

इस स्थिति को Decompression Sickness कहा जाता है।

धीरे-धीरे ऊपर आना और उचित breathing mixtures का उपयोग इस समस्या को कम करने में सहायता करता है।


17. वाष्प दाब

जब किसी द्रव को बंद पात्र में रखा जाता है, तो द्रव और उसके वाष्प के बीच संतुलन स्थापित हो जाता है।

संतुलन की अवस्था में वाष्प द्वारा लगाया गया दाब वाष्प दाब (Vapour Pressure) कहलाता है।

तापमान का प्रभाव

तापमान बढ़ने पर:

अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है → अधिक अणु द्रव की सतह से बाहर निकलते हैं → वाष्प दाब बढ़ता है।

इसलिए:

तापमान बढ़ने पर वाष्प दाब बढ़ता है।


18. अवाष्पशील विलेय को वाष्पशील विलायक में मिलाने पर

यदि किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय (Non-volatile solute) मिलाया जाए, तो विलेय के कण द्रव की सतह पर विलायक के कुछ अणुओं को प्रतिस्थापित कर देते हैं।

इससे विलायक के कम अणु वाष्प अवस्था में जा पाते हैं।

अतः:

विलयन का वाष्प दाब < शुद्ध विलायक का वाष्प दाब

यही प्रभाव कई सहलग्न गुणधर्मों का आधार है।


19. राउल्ट का नियम

वाष्पशील द्रवों के विलयन के लिए राउल्ट का नियम (Raoult’s Law) कहता है कि किसी घटक का आंशिक वाष्प दाब विलयन में उसके मोल प्रभाज के समानुपाती होता है।

घटक A के लिए:

pA = xA pA°

घटक B के लिए:

pB = xB pB°

जहाँ:

  • pA = A का आंशिक वाष्प दाब
  • xA = A का मोल प्रभाज
  • pA° = शुद्ध A का वाष्प दाब
  • pB = B का आंशिक वाष्प दाब
  • xB = B का मोल प्रभाज
  • pB° = शुद्ध B का वाष्प दाब

कुल वाष्प दाब:

P = pA + pB

अतः:

P = xA pA° + xB pB°


20. अवाष्पशील विलेय के लिए राउल्ट का नियम

यदि किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है:

p = x₁ p₁°

जहाँ:

  • p = विलयन का वाष्प दाब
  • x₁ = विलायक का मोल प्रभाज
  • p₁° = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब

चूँकि:

x₁ + x₂ = 1

इसलिए:

p = (1 − x₂)p₁°

अतः:

p₁° − p = x₂p₁°

या:

(p₁° − p)/p₁° = x₂

इसे वाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) कहते हैं।


21. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन

यह निम्न प्रकार दिया जाता है:

आपेक्षिक अवनमन = (p° − p)/p°

तनु विलयन में अवाष्पशील विलेय के लिए:

(p° − p)/p° = x₂

इस गुणधर्म का उपयोग विलेय का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने में किया जा सकता है।


22. आदर्श विलयन

जो विलयन सांद्रता की पूरी सीमा में राउल्ट के नियम का पालन करता है, उसे आदर्श विलयन (Ideal Solution) कहते हैं।

आदर्श विलयन के लिए:

ΔHmix = 0

और

ΔVmix = 0

इसका अर्थ है:

  • मिश्रण के दौरान कोई ऊष्मा अवशोषित या उत्सर्जित नहीं होती।
  • मिश्रण के दौरान आयतन में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होता।

उदाहरण

कुछ लगभग आदर्श विलयन हैं:

  • Benzene + Toluene
  • n-Hexane + n-Heptane

इनमें विभिन्न प्रकार के अणुओं के बीच आकर्षण बल लगभग समान होते हैं।


23. अनादर्श विलयन

जो विलयन राउल्ट के नियम का पूरी सांद्रता सीमा में पालन नहीं करते, उन्हें अनादर्श विलयन (Non-ideal Solutions) कहते हैं।

इनमें राउल्ट के नियम से विचलन पाया जाता है।

दो प्रकार के विचलन होते हैं:

  1. धनात्मक विचलन
  2. ऋणात्मक विचलन

24. राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन

जब किसी विलयन का वास्तविक वाष्प दाब राउल्ट के नियम से अपेक्षित वाष्प दाब से अधिक होता है, तो इसे धनात्मक विचलन (Positive Deviation) कहते हैं।

ऐसा तब होता है जब विभिन्न अणुओं के बीच आकर्षण बल, समान अणुओं के बीच आकर्षण बल से कमजोर होता है।

इसलिए अणु अधिक आसानी से वाष्प अवस्था में चले जाते हैं।

परिणाम

  • वाष्प दाब बढ़ता है।
  • ΔHmix > 0
  • ΔVmix > 0

उदाहरण

Ethanol + Acetone

एथेनॉल और एसीटोन के अणुओं के बीच बनने वाले आकर्षण के कारण शुद्ध एथेनॉल में उपस्थित मजबूत hydrogen bonding कम हो जाती है।


25. राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन

जब किसी विलयन का वास्तविक वाष्प दाब राउल्ट के नियम से अपेक्षित वाष्प दाब से कम होता है, तो इसे ऋणात्मक विचलन (Negative Deviation) कहते हैं।

यह तब होता है जब विभिन्न अणुओं के बीच आकर्षण बल समान अणुओं के बीच आकर्षण बल से अधिक मजबूत हो।

इस कारण अणुओं का वाष्प अवस्था में जाना कठिन हो जाता है।

परिणाम

  • वाष्प दाब घटता है।
  • ΔHmix < 0
  • ΔVmix < 0

उदाहरण

Chloroform + Acetone

इन दोनों घटकों के बीच मजबूत अंतराअणुक आकर्षण उत्पन्न होता है।


26. एज़ियोट्रोप

एज़ियोट्रोप (Azeotrope) ऐसा मिश्रण है जो एक निश्चित संघटन पर स्थिर तापमान पर उबलता है और उस अवस्था में द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाओं का संघटन समान होता है।

एज़ियोट्रोप को सामान्य fractional distillation द्वारा पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता।

मुख्य प्रकार:

  • न्यूनतम क्वथन एज़ियोट्रोप
  • अधिकतम क्वथन एज़ियोट्रोप

न्यूनतम क्वथन एज़ियोट्रोप

यह सामान्यतः धनात्मक विचलन से संबंधित होता है।

अधिकतम क्वथन एज़ियोट्रोप

यह सामान्यतः ऋणात्मक विचलन से संबंधित होता है।


27. सहलग्न गुणधर्म

सहलग्न गुणधर्म (Colligative Properties) वे गुणधर्म हैं जो मुख्य रूप से विलयन में उपस्थित विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की रासायनिक प्रकृति पर।

तनु विलयनों के लिए चार प्रमुख सहलग्न गुणधर्म हैं:

  1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन
  2. क्वथनांक में उन्नयन
  3. हिमांक में अवनमन
  4. परासरण दाब

28. क्वथनांक में उन्नयन

अवाष्पशील विलेय को किसी विलायक में मिलाने पर विलयन का क्वथनांक शुद्ध विलायक की तुलना में बढ़ जाता है।

क्यों?

विलेय मिलाने से विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है।

इसलिए वाष्प दाब को वायुमंडलीय दाब के बराबर करने के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।

अतः:

विलयन का क्वथनांक > शुद्ध विलायक का क्वथनांक

क्वथनांक में उन्नयन:

ΔTb = Tb − Tb°

तनु विलयन के लिए:

ΔTb = Kb m

जहाँ:

  • ΔTb = क्वथनांक में उन्नयन
  • Kb = मोलल क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक
  • m = मोललता

29. क्वथनांक में उन्नयन से मोलर द्रव्यमान

चूँकि:

ΔTb = Kb × m

और:

m = w₂/(M₂ × w₁)

जब w₁ को kg में व्यक्त किया गया हो:

M₂ = Kb × w₂ / (ΔTb × w₁)

जहाँ:

  • w₂ = विलेय का द्रव्यमान
  • M₂ = विलेय का मोलर द्रव्यमान
  • w₁ = विलायक का द्रव्यमान kg में

परीक्षा टिप

सूत्र लगाने से पहले यह अवश्य देखें कि विलायक का द्रव्यमान kg में है या नहीं।


30. हिमांक में अवनमन

अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाने पर विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है।

अतः:

विलयन का हिमांक < शुद्ध विलायक का हिमांक

हिमांक में अवनमन:

ΔTf = Tf° − Tf

तनु विलयन के लिए:

ΔTf = Kf m

जहाँ:

  • ΔTf = हिमांक में अवनमन
  • Kf = मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक
  • m = मोललता

31. हिमांक में अवनमन से मोलर द्रव्यमान

ΔTf = Kf m

से:

M₂ = Kf × w₂ / (ΔTf × w₁)

यहाँ w₁ को kg में लेना आवश्यक है जब standard molality relation का प्रयोग किया जा रहा हो।


32. बर्फ में नमक क्यों मिलाया जाता है?

नमक जल के हिमांक को कम कर देता है।

जब बर्फ और जल के मिश्रण में नमक मिलाया जाता है, तो हिमांक कम हो जाता है।

इस कारण मिश्रण 0°C से भी कम तापमान प्राप्त कर सकता है।

इस सिद्धांत का उपयोग:

  • Ice-cream बनाने में
  • Refrigeration mixtures में
  • बर्फ हटाने की प्रक्रियाओं में

किया जाता है।


33. परासरण

परासरण (Osmosis) अर्धपारगम्य झिल्ली (Semipermeable membrane) के माध्यम से विलायक के अणुओं का कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर जाना है।

अर्धपारगम्य झिल्ली विलायक के अणुओं को गुजरने देती है लेकिन विलेय के कणों को रोकती है।

परासरण की दिशा

सरल शब्दों में:

तनु विलयन → सांद्र विलयन

संतुलन स्थापित होने तक विलायक का प्रवाह जारी रह सकता है।


34. परासरण दाब

वह न्यूनतम बाहरी दाब जो परासरण को रोकने के लिए विलयन पर लगाया जाता है, परासरण दाब (Osmotic Pressure) कहलाता है।

इसे:

π

से प्रदर्शित किया जाता है।

तनु विलयन के लिए:

π = CRT

जहाँ:

  • π = परासरण दाब
  • C = सांद्रता mol L⁻¹ में
  • R = गैस स्थिरांक
  • T = परम तापमान Kelvin में

इसे इस प्रकार भी लिखा जा सकता है:

π = nRT/V

चूँकि:

n = w/M

अतः:

π = wRT/(MV)

इसलिए:

M = wRT/(πV)

यह समीकरण मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए महत्वपूर्ण है।


35. मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने में परासरण दाब उपयोगी क्यों है?

परासरण दाब को सामान्य तापमान के आसपास मापा जा सकता है।

इसलिए इसका उपयोग उन पदार्थों के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने में किया जाता है जो अधिक तापमान पर गर्म करने से अपघटित हो सकते हैं।

उदाहरण:

  • Protein
  • Polymer
  • Biomolecules

36. उत्क्रम परासरण

सामान्य परासरण में विलायक कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर जाता है।

उत्क्रम परासरण (Reverse Osmosis) में सांद्र विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब लगाया जाता है।

इसके कारण विलायक को विपरीत दिशा में अर्धपारगम्य झिल्ली से गुजरने के लिए बाध्य किया जाता है।

उपयोग

उत्क्रम परासरण का प्रमुख उपयोग:

जल शुद्धिकरण

में किया जाता है।


37. समपरासारी, अतिपरासारी और अल्पपरासारी विलयन

समपरासारी विलयन

समान तापमान पर समान परासरण दाब वाले दो विलयनों को समपरासारी (Isotonic) कहा जाता है।

अतिपरासारी विलयन

किसी दूसरे विलयन की तुलना में अधिक परासरण दाब वाले विलयन को अतिपरासारी (Hypertonic) कहते हैं।

अल्पपरासारी विलयन

किसी दूसरे विलयन की तुलना में कम परासरण दाब वाले विलयन को अल्पपरासारी (Hypotonic) कहते हैं।

ये शब्द जैविक तंत्रों को समझने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।


38. शुद्ध जल में लाल रक्त कोशिकाएँ क्यों फट सकती हैं?

लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर विभिन्न विलेय उपस्थित होते हैं।

यदि लाल रक्त कोशिका को शुद्ध जल में रखा जाए, तो बाहर का जल कोशिका के अंदर उपस्थित विलयन की तुलना में अपेक्षाकृत अल्पपरासारी होता है।

परासरण के कारण जल कोशिका में प्रवेश करता है।

अधिक मात्रा में जल के प्रवेश से कोशिका फूल सकती है और अंततः फट सकती है।

इस प्रक्रिया को Haemolysis (हीमोलाइसिस) कहते हैं।


39. असामान्य मोलर द्रव्यमान

कभी-कभी प्रयोग द्वारा प्राप्त मोलर द्रव्यमान अपेक्षित मोलर द्रव्यमान से अलग होता है।

ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि विलेय के कण विलयन में:

  • संघटित (Associate) हो सकते हैं।
  • वियोजित (Dissociate) हो सकते हैं।

चूँकि सहलग्न गुणधर्म विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, इसलिए कणों की संख्या में परिवर्तन से प्राप्त परिणाम भी बदल जाता है।


40. विलेय कणों का संघटन

संघटन (Association) में दो या दो से अधिक विलेय अणु आपस में जुड़कर एक बड़ी इकाई बनाते हैं।

उदाहरण:

2A ⇌ A₂

इस प्रक्रिया में कणों की कुल संख्या कम हो जाती है।

इसलिए सामान्य स्थिति की तुलना में सहलग्न गुणधर्म का प्रेक्षित मान कम हो सकता है।

उदाहरण

बेंजोइक अम्ल benzene में hydrogen bonding के कारण dimer बना सकता है।


41. विलेय कणों का वियोजन

वियोजन (Dissociation) में एक विलेय कण टूटकर दो या अधिक कणों में बदल जाता है।

उदाहरण:

NaCl → Na⁺ + Cl⁻

इस प्रक्रिया में कणों की संख्या बढ़ जाती है।

इसलिए सहलग्न गुणधर्म का प्रेक्षित मान सामान्य अपेक्षा से अधिक हो सकता है।


42. वान्ट हॉफ गुणक

संघटन और वियोजन के प्रभाव को ध्यान में रखने के लिए वान्ट हॉफ गुणक (van’t Hoff factor) का प्रयोग किया जाता है।

इसे:

i

से प्रदर्शित किया जाता है।

यह इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:

i = प्रेक्षित सहलग्न गुणधर्म / परिकलित सहलग्न गुणधर्म

उचित परिस्थितियों में:

i = सामान्य मोलर द्रव्यमान / प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान

संशोधित सहलग्न गुणधर्म समीकरण

क्वथनांक के लिए:

ΔTb = i Kb m

हिमांक के लिए:

ΔTf = i Kf m

परासरण दाब के लिए:

π = iCRT

वाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन के लिए:

(p° − p)/p° = i x₂


43. वान्ट हॉफ गुणक का अर्थ

संघटन या वियोजन नहीं

यदि विलेय के कणों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता:

i = 1

वियोजन

कणों की संख्या बढ़ती है।

इसलिए:

i > 1

संघटन

कणों की संख्या घटती है।

इसलिए:

i < 1

यह numerical problems में बहुत महत्वपूर्ण concept है।


44. कणों की संख्या और i के बीच संबंध

स्थितिकणों की संख्याi
संघटन/वियोजन नहींअपरिवर्तित1
वियोजनबढ़ती है> 1
संघटनघटती है< 1

45. वियोजन की मात्रा

यदि एक अणु पूर्ण वियोजन पर n कण बनाता है और α वियोजन की मात्रा है, तो:

i = 1 + (n − 1)α

अतः:

α = (i − 1)/(n − 1)

उदाहरण

NaCl के लिए:

NaCl → Na⁺ + Cl⁻

यहाँ:

n = 2

अतः:

i = 1 + α

इसलिए:

α = i − 1


46. संघटन की मात्रा

यदि n अणु मिलकर एक संघटित अणु बनाते हैं:

nA ⇌ Aₙ

तो:

i = 1 − α(n − 1)/n

यह समीकरण तब उपयोगी है जब संघटन के कारण कणों की संख्या कम हो जाती है।


47. महत्वपूर्ण सूत्रों का सारांश

सांद्रता

द्रव्यमान % = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100

आयतन % = (विलेय का आयतन / विलयन का आयतन) × 100

मोलरता = विलेय के मोल / विलयन का आयतन L में

मोललता = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान kg में

मोल प्रभाज = घटक के मोल / कुल मोल

हेनरी का नियम

p = KH x

राउल्ट का नियम

p₁ = x₁ p₁°

क्वथनांक में उन्नयन

ΔTb = i Kb m

हिमांक में अवनमन

ΔTf = i Kf m

परासरण दाब

π = iCRT

वान्ट हॉफ गुणक

i = प्रेक्षित सहलग्न गुणधर्म / परिकलित सहलग्न गुणधर्म


48. हल किया गया Numerical: मोलरता

प्रश्न

2 L विलयन में 5 mol विलेय उपस्थित है। विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए।

हल

सूत्र:

M = n/V

दिया गया:

n = 5 mol

V = 2 L

अतः:

M = 5/2

M = 2.5 M


49. हल किया गया Numerical: मोललता

प्रश्न

4 kg विलायक में 2 mol विलेय घुला हुआ है। विलयन की मोललता ज्ञात कीजिए।

हल

m = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान kg में

m = 2/4

m = 0.5 mol kg⁻¹


50. हल किया गया Numerical: क्वथनांक में उन्नयन

प्रश्न

किसी विलयन की मोललता 0.5 mol kg⁻¹ है तथा विलायक के लिए Kb = 0.52 K kg mol⁻¹ है। क्वथनांक में उन्नयन ज्ञात कीजिए।

हल

सूत्र:

ΔTb = Kb m

अतः:

ΔTb = 0.52 × 0.5

ΔTb = 0.26 K

इसलिए क्वथनांक में 0.26 K की वृद्धि होगी।


51. हल किया गया Numerical: हिमांक में अवनमन

प्रश्न

किसी विलयन की मोललता 0.2 mol kg⁻¹ है। यदि Kf = 1.86 K kg mol⁻¹ है, तो हिमांक में अवनमन ज्ञात कीजिए।

हल

ΔTf = Kf m

ΔTf = 1.86 × 0.2

ΔTf = 0.372 K

अतः हिमांक में 0.372 K की कमी होगी।


52. हल किया गया Numerical: परासरण दाब

प्रश्न

300 K तापमान पर किसी तनु विलयन की सांद्रता 0.1 mol L⁻¹ है। इसका परासरण दाब ज्ञात कीजिए।

दिया गया:

C = 0.1 mol L⁻¹

R = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹

T = 300 K

सूत्र:

π = CRT

अतः:

π = 0.1 × 0.0821 × 300

π ≈ 2.46 atm


53. विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ

गलती 1: मोलरता और मोललता को आपस में बदल देना

गलत:

मोलरता = मोल / kg विलायक

सही:

मोलरता → मोल / L विलयन

मोललता → मोल / kg विलायक


गलती 2: मोललता में विलयन का द्रव्यमान लेना

मोललता में:

विलायक का द्रव्यमान

लिया जाता है, विलयन का द्रव्यमान नहीं।


गलती 3: तापमान के प्रभाव को भूल जाना

मोलरता तापमान पर निर्भर करती है क्योंकि यह आयतन पर आधारित है।

मोललता तापमान से स्वतंत्र होती है क्योंकि यह द्रव्यमान पर आधारित है।


गलती 4: क्वथनांक और हिमांक के प्रभाव को उलट देना

अवाष्पशील विलेय मिलाने पर:

क्वथनांक ↑

हिमांक ↓


गलती 5: वान्ट हॉफ गुणक को भूल जाना

यदि विलेय संघटित या वियोजित होता है, तो केवल:

ΔTb = Kb m

या

ΔTf = Kf m

का प्रयोग करना गलत परिणाम दे सकता है।

ऐसी स्थिति में:

ΔTb = iKb m

और

ΔTf = iKf m

का प्रयोग करें।


गलती 6: धनात्मक और ऋणात्मक विचलन को उलट देना

धनात्मक विचलन → अपेक्षा से अधिक वाष्प दाब

ऋणात्मक विचलन → अपेक्षा से कम वाष्प दाब


गलती 7: परासरण दाब में Celsius का प्रयोग करना

π = CRT में तापमान को Kelvin में लेना चाहिए।

सूत्र:

T(K) = T(°C) + 273.15


54. बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को निम्न topics अच्छी तरह तैयार करने चाहिए:

  • विलयन की परिभाषा
  • सांद्रता व्यक्त करने की विभिन्न विधियाँ
  • मोलरता और मोललता
  • मोल प्रभाज
  • हेनरी का नियम
  • राउल्ट का नियम
  • आदर्श और अनादर्श विलयन
  • धनात्मक और ऋणात्मक विचलन
  • एज़ियोट्रोप
  • सहलग्न गुणधर्म
  • क्वथनांक में उन्नयन
  • हिमांक में अवनमन
  • परासरण और परासरण दाब
  • उत्क्रम परासरण
  • वान्ट हॉफ गुणक
  • संघटन और वियोजन

महत्वपूर्ण Derivations और Numerical Areas

विशेष ध्यान दें:

  • वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन
  • सहलग्न गुणधर्मों से मोलर द्रव्यमान
  • ΔTb = Kb m
  • ΔTf = Kf m
  • π = CRT
  • वान्ट हॉफ गुणक से correction

55. NEET/JEE के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

Competitive examinations में इस अध्याय के numerical और conceptual questions महत्वपूर्ण होते हैं।

इन topics पर विशेष ध्यान दें:

  • Molarity और Molality में conversion
  • Mole fraction calculations
  • Raoult’s law
  • Vapour pressure graphs
  • Positive और negative deviations
  • Henry’s law
  • Colligative property numericals
  • van’t Hoff factor
  • Degree of dissociation
  • Degree of association
  • Abnormal molar mass
  • Isotonic solutions

एक बहुत महत्वपूर्ण pattern है कि विलेय के कणों की संख्या किस प्रकार बदलती है।

याद रखें:

वियोजन → कणों की संख्या बढ़ती है → i > 1

संघटन → कणों की संख्या घटती है → i < 1


56. अभ्यास प्रश्न

वैचारिक प्रश्न

  1. विलयन क्या है? इसके दो प्रमुख घटकों को समझाइए।
  2. मोलरता और मोललता में अंतर लिखिए।
  3. मोललता तापमान से स्वतंत्र क्यों होती है?
  4. हेनरी के नियम को लिखिए।
  5. दाब बढ़ाने पर गैस की द्रव में विलेयता क्यों बढ़ती है?
  6. वाष्पशील घटकों वाले विलयन के लिए राउल्ट का नियम लिखिए।
  7. आदर्श विलयन क्या है?
  8. राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन क्या है?
  9. परासरण दाब की परिभाषा दीजिए।
  10. उत्क्रम परासरण का उपयोग जल शुद्धिकरण में क्यों किया जाता है?

Numerical Practice

  1. 250 mL विलयन में 0.5 mol विलेय है। इसकी मोलरता ज्ञात कीजिए।
  2. 2 kg विलायक में 1 mol विलेय घुला है। मोललता ज्ञात कीजिए।
  3. यदि Kb = 0.50 K kg mol⁻¹ और मोललता = 0.4 mol kg⁻¹ है, तो ΔTb ज्ञात कीजिए।
  4. यदि Kf = 1.86 K kg mol⁻¹ और मोललता = 0.25 mol kg⁻¹ है, तो ΔTf ज्ञात कीजिए।
  5. 300 K पर किसी विलयन की सांद्रता 0.2 mol L⁻¹ है। R = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹ लेते हुए परासरण दाब ज्ञात कीजिए।

57. 20 महत्वपूर्ण MCQs

1. निम्नलिखित में से कौन-सी सांद्रता तापमान से स्वतंत्र होती है?

A. मोलरता
B. मोललता
C. आयतन प्रतिशत
D. सामान्यता

उत्तर: B. मोललता

मोललता विलायक के द्रव्यमान पर आधारित होती है और द्रव्यमान तापमान के साथ सामान्यतः नहीं बदलता।


2. मोललता की इकाई है:

A. mol L⁻¹
B. mol kg⁻¹
C. g L⁻¹
D. kg mol⁻¹

उत्तर: B. mol kg⁻¹


3. मोल प्रभाज:

A. mol L⁻¹ में व्यक्त होता है
B. mol kg⁻¹ में व्यक्त होता है
C. विमाहीन होता है
D. g L⁻¹ में व्यक्त होता है

उत्तर: C. विमाहीन होता है


4. हेनरी के नियम का सही समीकरण है:

A. p = KH/x
B. p = KHx
C. p = x/KH²
D. p = x + KH

उत्तर: B. p = KHx


5. किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर:

A. वाष्प दाब बढ़ता है
B. वाष्प दाब घटता है
C. वाष्प दाब अपरिवर्तित रहता है
D. वाष्प दाब अनंत हो जाता है

उत्तर: B. वाष्प दाब घटता है


6. अवाष्पशील विलेय वाले विलयन का क्वथनांक:

A. शुद्ध विलायक से कम होता है
B. शुद्ध विलायक के बराबर होता है
C. शुद्ध विलायक से अधिक होता है
D. हमेशा 0°C होता है

उत्तर: C. शुद्ध विलायक से अधिक होता है


7. अवाष्पशील विलेय वाले विलयन का हिमांक:

A. शुद्ध विलायक से अधिक होता है
B. शुद्ध विलायक से कम होता है
C. हमेशा समान होता है
D. विलेय से स्वतंत्र होता है

उत्तर: B. शुद्ध विलायक से कम होता है


8. निम्नलिखित में से कौन-सा सहलग्न गुणधर्म है?

A. श्यानता
B. पृष्ठ तनाव
C. परासरण दाब
D. रंग

उत्तर: C. परासरण दाब


9. आदर्श विलयन के लिए:

A. ΔHmix = 0
B. ΔHmix > 0
C. ΔHmix < 0
D. ΔHmix अनंत होता है

उत्तर: A. ΔHmix = 0


10. राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन का अर्थ है:

A. अपेक्षा से कम वाष्प दाब
B. अपेक्षा से अधिक वाष्प दाब
C. शून्य वाष्प दाब
D. वाष्प का निर्माण नहीं होना

उत्तर: B. अपेक्षा से अधिक वाष्प दाब


11. वियोजन में विलेय कणों की संख्या सामान्यतः:

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. शून्य हो जाती है
D. हमेशा अपरिवर्तित रहती है

उत्तर: B. बढ़ती है


12. वियोजन के लिए वान्ट हॉफ गुणक सामान्यतः:

A. i < 1
B. i = 0
C. i > 1
D. i = −1

उत्तर: C. i > 1


13. संघटन के लिए वान्ट हॉफ गुणक सामान्यतः:

A. 1 से अधिक
B. 1 से कम
C. 10 के बराबर
D. हमेशा शून्य

उत्तर: B. 1 से कम


14. परासरण दाब को किस प्रतीक से दर्शाया जाता है?

A. π
B. α
C. β
D. μ

उत्तर: A. π


15. तनु विलयन के परासरण दाब का सही समीकरण है:

A. π = CRT
B. π = C/RT
C. π = C + RT
D. π = R/C

उत्तर: A. π = CRT


16. उत्क्रम परासरण का उपयोग मुख्यतः किसके लिए किया जाता है?

A. केवल आसवन
B. जल शुद्धिकरण
C. ऊर्ध्वपातन
D. क्रिस्टलीकरण

उत्तर: B. जल शुद्धिकरण


17. एज़ियोट्रोप:

A. हमेशा fractional distillation द्वारा पूरी तरह अलग किया जा सकता है
B. एज़ियोट्रोपिक बिंदु पर द्रव और वाष्प के संघटन अलग होते हैं
C. स्थिर संघटन पर उबलता है
D. केवल ठोसों से बना होता है

उत्तर: C. स्थिर संघटन पर उबलता है


18. यदि विलेय का संघटन या वियोजन नहीं होता, तो वान्ट हॉफ गुणक:

A. 0
B. 0.5
C. 1
D. 2

उत्तर: C. 1


19. मोलरता किस पर आधारित होती है?

A. विलायक के द्रव्यमान पर
B. विलयन के आयतन पर
C. केवल विलयन के द्रव्यमान पर
D. केवल विलायक के अणुओं की संख्या पर

उत्तर: B. विलयन के आयतन पर


20. अवाष्पशील विलेय मिलाने पर:

A. हिमांक में उन्नयन होता है
B. हिमांक में अवनमन होता है
C. हिमांक में कोई परिवर्तन नहीं होता
D. अधिक तापमान पर जमाव होता है

उत्तर: B. हिमांक में अवनमन


58. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विलेय और विलायक में क्या अंतर है?

विलेय वह पदार्थ है जो विलयन में घुलता है, जबकि विलायक वह माध्यम है जिसमें विलेय घुलता है।

क्या मोलरता तापमान पर निर्भर करती है?

हाँ। मोलरता विलयन के आयतन पर आधारित होती है और आयतन तापमान के साथ बदल सकता है।

क्या मोललता तापमान पर निर्भर करती है?

नहीं। मोललता विलायक के द्रव्यमान पर आधारित होती है और सामान्य परिस्थितियों में द्रव्यमान तापमान के साथ नहीं बदलता।

अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब पर क्या प्रभाव पड़ता है?

विलयन का वाष्प दाब शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है।

सहलग्न गुणधर्म क्या हैं?

वे गुणधर्म जो मुख्य रूप से विलयन में उपस्थित विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, सहलग्न गुणधर्म कहलाते हैं।

अवाष्पशील विलेय मिलाने पर क्वथनांक क्यों बढ़ता है?

विलेय मिलाने से विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है। इसलिए वाष्प दाब को वायुमंडलीय दाब के बराबर करने के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।

हिमांक क्यों कम हो जाता है?

विलेय की उपस्थिति विलायक के ठोस और द्रव प्रावस्थाओं के बीच संतुलन को प्रभावित करती है, जिसके कारण विलयन कम तापमान पर जमता है।

मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने में परासरण दाब उपयोगी क्यों है?

इसे अपेक्षाकृत कम तापमान पर मापा जा सकता है। इसलिए proteins, polymers और biomolecules जैसे उच्च मोलर द्रव्यमान वाले पदार्थों के लिए यह उपयोगी है।

i > 1 क्या दर्शाता है?

सामान्यतः i > 1 वियोजन को दर्शाता है क्योंकि वियोजन के कारण कणों की संख्या बढ़ जाती है।

i < 1 क्या दर्शाता है?

सामान्यतः i < 1 संघटन को दर्शाता है क्योंकि संघटन के कारण कणों की संख्या घट जाती है।


59. त्वरित पुनरावृत्ति – विलयन

इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखें:

  • मोलरता → मोल / लीटर विलयन
  • मोललता → मोल / kg विलायक
  • मोल प्रभाज → घटक के मोल / कुल मोल
  • दाब बढ़ने पर गैस की विलेयता सामान्यतः बढ़ती है
  • हेनरी का नियम → p = KHx
  • अवाष्पशील विलेय → वाष्प दाब घटता है
  • क्वथनांक → बढ़ता है
  • हिमांक → घटता है
  • आदर्श विलयन → राउल्ट के नियम का पालन करता है
  • धनात्मक विचलन → अधिक वाष्प दाब
  • ऋणात्मक विचलन → कम वाष्प दाब
  • सहलग्न गुणधर्म → विलेय कणों की संख्या पर निर्भर
  • वियोजन → i > 1
  • संघटन → i < 1
  • संघटन/वियोजन नहीं → i = 1
  • परासरण दाब → π = iCRT
  • क्वथनांक में उन्नयन → ΔTb = iKb m
  • हिमांक में अवनमन → ΔTf = iKf m

इस अध्याय को समझने का सबसे अच्छा तरीका केवल formulas याद करना नहीं है। यह समझें कि विलेय मिलाने पर विलेय कणों की संख्या, वाष्प दाब, क्वथनांक, हिमांक और परासरण दाब में क्या परिवर्तन होता है और क्यों होता है। यह conceptual understanding इस अध्याय के numerical और theory दोनों प्रकार के प्रश्नों को हल करने में बहुत मदद करती है।


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