- पुल्लिंग
- स्त्रीलिंग
- उभयलिंग (Ubhayaling)
- लिंगवाची विशेष शब्द
- लिंग परिवर्तन के नियम
- भिन्न रूपों वाले पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द
- ‘वाला’ प्रत्यय का ‘वाली’ में परिवर्तन
- शब्द की जाति को लिंग कहते है ।
- छत्तीसगढ़ी की कुछ संज्ञाएं केवल पुल्लिंग होती है , कुछ केवल स्त्रीलिंग और संज्ञाएं उभय लिंगों में प्रयुक्त होती है ।
- छत्तीसगढ़ी में पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग होता है पर नपुंसक लिंग नहीं ।
पुल्लिंग
कुछ संज्ञा शब्दों का प्रयोग केवल पुल्लिंग रूप में होता है, जैसे:
चाउर (चावल), पाना (पत्ता), पखना (पत्थर), फर (फल), कउवा (कौवा)
सामान्य नियम:
🔹 आकारांत – पुल्लिंग
छत्तीसगढ़ी के आकारांत शब्द प्रायः पुल्लिंग होते हैं, जैसे:
दसना (बिस्तर), बइगा (ओझा), ओढ़ना (ढकने का कपड़ा), टाट (टाटपट्टी)
अपवाद:
या, मया, चिंता, सुतिया, सूता, फरिया — ये सभी ‘आ’ में अंत होते हैं, परंतु स्त्रीलिंग हैं।
🔹 ‘वा’, ‘उवा’ प्रत्यय वाले
गरूवा (जानवर), भलुवा (भालू)
🔹 ऊकारांत शब्द
खाऊ, गरू, बुद्धू, भोंदू, साधू
🔹 ‘पा’, ‘पन’ प्रत्यय वाले
बुढ़ापा, छोटापन, लड़कपन
🔹 पुरुषों के नाम
सुखदेव, जुगुन, शरद, अशोक, आकाश, बुधारू, फेकू, समारू
🔹 पुरुष जाति बोधक
कुकुर, बइला, बघवा, टूरा, बाबू, दुलहा, घसिया, कोचिया
🔹 समूहवाची नाम
घराना, टोला, पारा, मोहल्ला
🔹 अप्राणीवाचक आकारांत
घर, दुआर, खेत, खार, बन, कोठार
🔹 सब पर्वतों के नाम
दलहा, सिरसिंगा, सतपुरा, सिहावा, गौरलाटा
🔹 अनेक वृक्षों के नाम
आमा, जामुन, मुनगा, सरई
🔹 कुछ पदार्थों के नाम
पानी, घिऊ, दही, दूध, मही, लेवना
🔹 महीनों, दिनों के नाम
जेठ, असाढ़, सावन, भादो, कुंवार, सम्मार, मंगल, बियस्पत, इतवार
🔹 कुछ अनाजों के नाम
धान, चना
🔹 सभी धातुओं के नाम
लोहा, फूलकांस, तामा
(अपवाद: चांदी — स्त्रीलिंग है)
🔹 भाववाचक संज्ञा
ब, अब, उब, वह, अ, प, पा, पन से अंत होने वाले शब्द पुल्लिंग होते हैं, जैसे:
मिलब (मिलन), सजाउब (सजाना), छुआ (अपवित्र), अमठपन
स्त्रीलिंग
कुछ संज्ञा शब्दों का प्रयोग केवल स्त्रीलिंग रूप में होता है, जैसे:
सती, गाभिन (गर्भवती), सउत (सपत्नी), बिहइ (ब्याहता), जोत (ज्योति)
सामान्य नियम:
🔹 ईकारांत – स्त्रीलिंग
छत्तीसगढ़ी के ईकारांत शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं, जैसे:
माटी (मिट्टी), लउठी (लाठी), चटई (चटाई), खेखर्री (लोमड़ी), भूसड़ी (मच्छर)
अपवाद:
गंवई, घी, दही, नाती, पांखी (पक्षी), पानी, बढ़ई, हाथी — ये पुल्लिंग हैं।
(विशेष अपवाद: भात)
🔹 ‘त’ से अंत
प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं, जैसे:
बात, रात
(अपवाद: भात)
🔹 अकारांत स्त्रीलिंग
संस्कृत के अकारांत स्त्रीलिंग शब्दों से व्युत्पन्न, जैसे:
जीभ (जिह्वा), भूख (बुभूक्षा)
🔹 संस्कृत अकारांत स्त्रीलिंग शब्द
उदाहरण: अग्या (आज्ञा), छिमा (क्षमा), पटिया (पट्टिका), संझा (संध्या)
🔹 इया प्रत्यय
डबिया (डिबिया), फरिया (चिंदी)
(अपवाद: कोचिया, तेलिया, बनिया — ये पुल्लिंग हैं)
🔹 इन, अइन प्रत्यय
गाभिन, तेलिन, परेतिन, पापिन, लोहारिन, सोनारिन, कोष्टिन, गुरुवइन, गोसइंन, ठकुरइन, पंडितइन, हलवइन
🔹 निन प्रत्यय
धोबनिन, मुसलमानिन, मेहतरानिन
🔹 स्त्रियों के नाम
सबितिरी, रामकली, फुलकुवारी, लछमी
🔹 स्त्री जाति बोधक शब्द
सिवनाथ, हसदो, अकादसी, तीजा
🔹 ‘सी’ प्रत्यय युक्त क्रियापद
प्रायः स्त्रीलिंग में ही होते हैं, जैसे:
कहासी (कहने की इच्छा), जवासी (जाने की इच्छा), खवासी, ऊघासी, घबरासी
🔹 भाववाचक संज्ञा
ई, ही, अई, आई, आस, सी से अंत होने वाले शब्द, जैसे:
चिल्लई, बुरई, जुआनी (यौवन), पिआई, करुआई, मिठास
उभयलिंग (Ubhayaling)
परिभाषा:
जो शब्द दोनों जातियों (स्त्री और पुरुष) के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जैसे –
- गिया (मित्र)
- संगी
- गरूआ
- मनखे, मनसे
- जंहूरिया
- लाइका
- लगवार
- जाँवर
- चिरई
- हितवा
- बैरी
- पहुना
लिंगवाची विशेष शब्द
छत्तीसगढ़ी में मानवेतर जीवधारियों के लिंग निर्धारण के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग होता है, जैसे:
प्रमुख शब्द:
- एंड़रा – एंड़री
- डौका – डौकी
- माई
- नर – मादी
पुल्लिंग रूप (Noun – Masculine)
- एंड़रा चीतल (नर चीतल)
- डौका कीरा (नर कीड़ा)
- नर गुडेला, नर चिरइ
- एंड़ा कुरारी (नर बगुला)
- एंड़रो भालू
- एंड़रा तितर
स्त्रीलिंग रूप (Noun – Feminine)
- एंड़री चीतल (मादा चीतल)
- डौकी कीरा (मादा कीड़ा)
- माई कोकड़ा, माई भालू
- मादी गुडेला, मादी चिरई
- माई कुरारी
- माई/एंड़री भालू
- माई/एंड़री तितर
लिंग परिवर्तन के नियम
छत्तीसगढ़ी में पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के लिए विभिन्न प्रत्ययों का प्रयोग होता है:
| प्रत्यय | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|
| ई | टूरा | टूरी |
| डौका | डौकी | |
| कुकरा | कुकरी | |
| चांटा | चांटी | |
| बेंदरा | बेंदरी | |
| इया | बछवा | बछिया |
| बुढ़वा | बुढ़िया | |
| घोड़वा | घोड़िया | |
| पंड़वा | पंडिया | |
| इन | तेली | तेलिन |
| लोहार | लोहारिन | |
| कोष्टा | कोष्टिन | |
| मास्टर | मास्टरिन | |
| कलेक्टर | कलेक्टरिन | |
| निन | हाथी | हथनिन |
| नाती | नतनिन | |
| धोबी | धोबनिन | |
| बनिया | बननिन | |
| गौटिया | गौटिनिन | |
| कोचिया | कोचनिन | |
| बघवा | बघनिन | |
| गोसाइंया | गोसनिन | |
| आनी | देवर | देवरानी |
| जेठ | जेठानी | |
| आइन | गुरू | गुरवाइन |
| ठाकुर | ठकुराइन | |
| दुबे | दुबाइन | |
| मिसिर | मिसराइन | |
| बाबू | बबुआइन | |
| लाला | ललाइन | |
| साहेब | सहबाइन | |
| इन्सपेक्टर | इनिसपेक्टराइन |
भिन्न रूपों वाले पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|
| ददा (पिता) | दाई (माता) |
| बाप | महतारी |
| बाबू (पुत्र) | नोनी |
| बेटा | पतो / पत्तो |
| भैया | भौजी / भौजाई |
| भाई | बहिनी |
| भांटों (जीजा) | दीदी |
| देवर | ननंद |
| बइला | गाय |
| भैंस | भैइस |
‘वाला’ प्रत्यय का ‘वाली’ में परिवर्तन
| पुल्लिंग (वाला) | स्त्रीलिंग (वाली) |
|---|---|
| घरवाला | घरवाली |
| बेलासपुरवाला | बेलासपुरवाली |
| रायपुर वाला | रायपुर वाली |
| मुंबई वाला | मुंबई वाली |
| बंबई वाला | बंबई वाली |
छत्तीसगढ़ी भाषा ब्लॉग पोस्ट(CGPSC)


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