छत्तीसगढ़ी बोली में लिंग व्यवस्था

  1. पुल्लिंग
    1. सामान्य नियम:
      1. 🔹 आकारांत – पुल्लिंग
      2. 🔹 ‘वा’, ‘उवा’ प्रत्यय वाले
      3. 🔹 ऊकारांत शब्द
      4. 🔹 ‘पा’, ‘पन’ प्रत्यय वाले
      5. 🔹 पुरुषों के नाम
      6. 🔹 पुरुष जाति बोधक
      7. 🔹 समूहवाची नाम
      8. 🔹 अप्राणीवाचक आकारांत
      9. 🔹 सब पर्वतों के नाम
      10. 🔹 अनेक वृक्षों के नाम
      11. 🔹 कुछ पदार्थों के नाम
      12. 🔹 महीनों, दिनों के नाम
      13. 🔹 कुछ अनाजों के नाम
      14. 🔹 सभी धातुओं के नाम
      15. 🔹 भाववाचक संज्ञा
  2. स्त्रीलिंग
    1. सामान्य नियम:
      1. 🔹 ईकारांत – स्त्रीलिंग
      2. 🔹 ‘त’ से अंत
      3. 🔹 अकारांत स्त्रीलिंग
      4. 🔹 संस्कृत अकारांत स्त्रीलिंग शब्द
      5. 🔹 इया प्रत्यय
      6. 🔹 इन, अइन प्रत्यय
      7. 🔹 निन प्रत्यय
      8. 🔹 स्त्रियों के नाम
      9. 🔹 स्त्री जाति बोधक शब्द
      10. 🔹 ‘सी’ प्रत्यय युक्त क्रियापद
      11. 🔹 भाववाचक संज्ञा
  3. उभयलिंग (Ubhayaling)
  4. लिंगवाची विशेष शब्द
    1. पुल्लिंग रूप (Noun – Masculine)
    2. स्त्रीलिंग रूप (Noun – Feminine)
  5. लिंग परिवर्तन के नियम
  6. भिन्न रूपों वाले पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द
  7. ‘वाला’ प्रत्यय का ‘वाली’ में परिवर्तन
  • शब्द की जाति को लिंग कहते है ।
  • छत्तीसगढ़ी की कुछ संज्ञाएं केवल पुल्लिंग होती है , कुछ केवल स्त्रीलिंग और संज्ञाएं उभय लिंगों में प्रयुक्त होती है ।
  • छत्तीसगढ़ी में पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग होता है पर नपुंसक लिंग नहीं ।

पुल्लिंग

कुछ संज्ञा शब्दों का प्रयोग केवल पुल्लिंग रूप में होता है, जैसे:
चाउर (चावल), पाना (पत्ता), पखना (पत्थर), फर (फल), कउवा (कौवा)


सामान्य नियम:

🔹 आकारांत – पुल्लिंग

छत्तीसगढ़ी के आकारांत शब्द प्रायः पुल्लिंग होते हैं, जैसे:
दसना (बिस्तर), बइगा (ओझा), ओढ़ना (ढकने का कपड़ा), टाट (टाटपट्टी)

अपवाद:
या, मया, चिंता, सुतिया, सूता, फरिया — ये सभी ‘आ’ में अंत होते हैं, परंतु स्त्रीलिंग हैं।

🔹 ‘वा’, ‘उवा’ प्रत्यय वाले

गरूवा (जानवर), भलुवा (भालू)

🔹 ऊकारांत शब्द

खाऊ, गरू, बुद्धू, भोंदू, साधू

🔹 ‘पा’, ‘पन’ प्रत्यय वाले

बुढ़ापा, छोटापन, लड़कपन

🔹 पुरुषों के नाम

सुखदेव, जुगुन, शरद, अशोक, आकाश, बुधारू, फेकू, समारू

🔹 पुरुष जाति बोधक

कुकुर, बइला, बघवा, टूरा, बाबू, दुलहा, घसिया, कोचिया

🔹 समूहवाची नाम

घराना, टोला, पारा, मोहल्ला

🔹 अप्राणीवाचक आकारांत

घर, दुआर, खेत, खार, बन, कोठार

🔹 सब पर्वतों के नाम

दलहा, सिरसिंगा, सतपुरा, सिहावा, गौरलाटा

🔹 अनेक वृक्षों के नाम

आमा, जामुन, मुनगा, सरई

🔹 कुछ पदार्थों के नाम

पानी, घिऊ, दही, दूध, मही, लेवना

🔹 महीनों, दिनों के नाम

जेठ, असाढ़, सावन, भादो, कुंवार, सम्मार, मंगल, बियस्पत, इतवार

🔹 कुछ अनाजों के नाम

धान, चना

🔹 सभी धातुओं के नाम

लोहा, फूलकांस, तामा
(अपवाद: चांदीस्त्रीलिंग है)

🔹 भाववाचक संज्ञा

ब, अब, उब, वह, अ, प, पा, पन से अंत होने वाले शब्द पुल्लिंग होते हैं, जैसे:
मिलब (मिलन), सजाउब (सजाना), छुआ (अपवित्र), अमठपन


स्त्रीलिंग

कुछ संज्ञा शब्दों का प्रयोग केवल स्त्रीलिंग रूप में होता है, जैसे:
सती, गाभिन (गर्भवती), सउत (सपत्नी), बिहइ (ब्याहता), जोत (ज्योति)


सामान्य नियम:

🔹 ईकारांत – स्त्रीलिंग

छत्तीसगढ़ी के ईकारांत शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं, जैसे:
माटी (मिट्टी), लउठी (लाठी), चटई (चटाई), खेखर्री (लोमड़ी), भूसड़ी (मच्छर)

अपवाद:
गंवई, घी, दही, नाती, पांखी (पक्षी), पानी, बढ़ई, हाथी — ये पुल्लिंग हैं।
(विशेष अपवाद: भात)

🔹 ‘त’ से अंत

प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं, जैसे:
बात, रात
(अपवाद: भात)

🔹 अकारांत स्त्रीलिंग

संस्कृत के अकारांत स्त्रीलिंग शब्दों से व्युत्पन्न, जैसे:
जीभ (जिह्वा), भूख (बुभूक्षा)

🔹 संस्कृत अकारांत स्त्रीलिंग शब्द

उदाहरण: अग्या (आज्ञा), छिमा (क्षमा), पटिया (पट्टिका), संझा (संध्या)

🔹 इया प्रत्यय

डबिया (डिबिया), फरिया (चिंदी)
(अपवाद: कोचिया, तेलिया, बनिया — ये पुल्लिंग हैं)

🔹 इन, अइन प्रत्यय

गाभिन, तेलिन, परेतिन, पापिन, लोहारिन, सोनारिन, कोष्टिन, गुरुवइन, गोसइंन, ठकुरइन, पंडितइन, हलवइन

🔹 निन प्रत्यय

धोबनिन, मुसलमानिन, मेहतरानिन

🔹 स्त्रियों के नाम

सबितिरी, रामकली, फुलकुवारी, लछमी

🔹 स्त्री जाति बोधक शब्द

सिवनाथ, हसदो, अकादसी, तीजा

🔹 ‘सी’ प्रत्यय युक्त क्रियापद

प्रायः स्त्रीलिंग में ही होते हैं, जैसे:
कहासी (कहने की इच्छा), जवासी (जाने की इच्छा), खवासी, ऊघासी, घबरासी

🔹 भाववाचक संज्ञा

ई, ही, अई, आई, आस, सी से अंत होने वाले शब्द, जैसे:
चिल्लई, बुरई, जुआनी (यौवन), पिआई, करुआई, मिठास


उभयलिंग (Ubhayaling)

परिभाषा:
जो शब्द दोनों जातियों (स्त्री और पुरुष) के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जैसे –

  • गिया (मित्र)
  • संगी
  • गरूआ
  • मनखे, मनसे
  • जंहूरिया
  • लाइका
  • लगवार
  • जाँवर
  • चिरई
  • हितवा
  • बैरी
  • पहुना

लिंगवाची विशेष शब्द

छत्तीसगढ़ी में मानवेतर जीवधारियों के लिंग निर्धारण के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग होता है, जैसे:

प्रमुख शब्द:

  • एंड़रा – एंड़री
  • डौका – डौकी
  • माई
  • नर – मादी

पुल्लिंग रूप (Noun – Masculine)

  • एंड़रा चीतल (नर चीतल)
  • डौका कीरा (नर कीड़ा)
  • नर गुडेला, नर चिरइ
  • एंड़ा कुरारी (नर बगुला)
  • एंड़रो भालू
  • एंड़रा तितर

स्त्रीलिंग रूप (Noun – Feminine)

  • एंड़री चीतल (मादा चीतल)
  • डौकी कीरा (मादा कीड़ा)
  • माई कोकड़ा, माई भालू
  • मादी गुडेला, मादी चिरई
  • माई कुरारी
  • माई/एंड़री भालू
  • माई/एंड़री तितर

लिंग परिवर्तन के नियम

छत्तीसगढ़ी में पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के लिए विभिन्न प्रत्ययों का प्रयोग होता है:

प्रत्ययपुल्लिंगस्त्रीलिंग
टूराटूरी
डौकाडौकी
कुकराकुकरी
चांटाचांटी
बेंदराबेंदरी
इयाबछवाबछिया
बुढ़वाबुढ़िया
घोड़वाघोड़िया
पंड़वापंडिया
इनतेलीतेलिन
लोहारलोहारिन
कोष्टाकोष्टिन
मास्टरमास्टरिन
कलेक्टरकलेक्टरिन
निनहाथीहथनिन
नातीनतनिन
धोबीधोबनिन
बनियाबननिन
गौटियागौटिनिन
कोचियाकोचनिन
बघवाबघनिन
गोसाइंयागोसनिन
आनीदेवरदेवरानी
जेठजेठानी
आइनगुरूगुरवाइन
ठाकुरठकुराइन
दुबेदुबाइन
मिसिरमिसराइन
बाबूबबुआइन
लालाललाइन
साहेबसहबाइन
इन्सपेक्टरइनिसपेक्टराइन

भिन्न रूपों वाले पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
ददा (पिता)दाई (माता)
बापमहतारी
बाबू (पुत्र)नोनी
बेटापतो / पत्तो
भैयाभौजी / भौजाई
भाईबहिनी
भांटों (जीजा)दीदी
देवरननंद
बइलागाय
भैंसभैइस

‘वाला’ प्रत्यय का ‘वाली’ में परिवर्तन

पुल्लिंग (वाला)स्त्रीलिंग (वाली)
घरवालाघरवाली
बेलासपुरवालाबेलासपुरवाली
रायपुर वालारायपुर वाली
मुंबई वालामुंबई वाली
बंबई वालाबंबई वाली

छत्तीसगढ़ी भाषा ब्लॉग पोस्ट(CGPSC)

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