d- और f-ब्लॉक के तत्व
d- और f-ब्लॉक के तत्व अध्याय में मुख्य रूप से उन तत्वों का अध्ययन किया जाता है जिनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन क्रमशः d-कक्षक (d-orbital) या f-कक्षक (f-orbital) में प्रवेश करता है। कक्षा 12 के लिए यह अध्याय तब आसान हो जाता है जब आप परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाओं, रंगीन आयनों, चुंबकीय गुणों, उत्प्रेरकीय सक्रियता, संकुल निर्माण, मिश्रधातु निर्माण तथा लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड के गुणों के पीछे का कारण समझ लेते हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, प्रवृत्तियाँ, संक्रमण तत्वों के महत्वपूर्ण यौगिक, लैंथेनाइड संकुचन तथा KMnO₄/K₂Cr₂O₇ की अभिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं। NEET/JEE में इन गुणों के पीछे के कारण और अपवाद विशेष रूप से पूछे जा सकते हैं।
1. d-ब्लॉक के तत्व क्या हैं?
वे तत्व जिनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन पेनल्टीमेट कोश (penultimate shell) के d-उपकोश में प्रवेश करता है, d-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।
ये मुख्यतः आवर्त सारणी के समूह 3–12 में स्थित होते हैं।
इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है:
(n − 1)d¹–¹⁰ ns⁰–²
यहाँ:
- n = सबसे बाहरी कोश
- (n − 1)d = पेनल्टीमेट कोश का d-उपकोश
- d-उपकोश में अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।
उदाहरण
स्कैन्डियम:
Sc = [Ar] 3d¹ 4s²
टाइटेनियम:
Ti = [Ar] 3d² 4s²
लोहा:
Fe = [Ar] 3d⁶ 4s²
ताँबा:
Cu = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
Cu का विन्यास महत्वपूर्ण है। अपेक्षित विन्यास 3d⁹ 4s² होने के बजाय इसका वास्तविक विन्यास है:
Cu = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पूर्ण भरा हुआ 3d¹⁰ उपकोश अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है।
2. संक्रमण तत्व क्या हैं?
संक्रमण तत्व वह तत्व है जिसके परमाणु या उसके कम-से-कम एक आयन में अपूर्ण d-उपकोश उपस्थित हो।
इस परिभाषा से एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है:
प्रत्येक संक्रमण तत्व d-ब्लॉक का तत्व होता है, लेकिन प्रत्येक d-ब्लॉक का तत्व संक्रमण तत्व नहीं होता।
क्यों?
जिंक को देखिए:
Zn = [Ar] 3d¹⁰ 4s²
Zn²⁺:
Zn²⁺ = [Ar] 3d¹⁰
Zn और Zn²⁺ दोनों में d-उपकोश पूर्ण रूप से भरा हुआ है। इसलिए Zn d-ब्लॉक का तत्व है, लेकिन संक्रमण तत्व नहीं है।
इसी प्रकार:
- Cd → संक्रमण तत्व नहीं
- Hg → संक्रमण तत्व नहीं
महत्वपूर्ण उदाहरण
| तत्व | इलेक्ट्रॉनिक विन्यास | संक्रमण तत्व? |
|---|---|---|
| Sc | 3d¹ 4s² | हाँ |
| Ti | 3d² 4s² | हाँ |
| Fe | 3d⁶ 4s² | हाँ |
| Cu | 3d¹⁰ 4s¹ | हाँ |
| Zn | 3d¹⁰ 4s² | नहीं |
3. d-ब्लॉक तत्वों की स्थिति
चार प्रमुख संक्रमण श्रेणियाँ हैं:
| श्रेणी | तत्व |
|---|---|
| 3d श्रेणी | Sc से Zn |
| 4d श्रेणी | Y से Cd |
| 5d श्रेणी | Hf से Hg |
| 6d श्रेणी | Rf के आगे के तत्व |
कक्षा 12 में 3d श्रेणी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
3d श्रेणी
Sc → Ti → V → Cr → Mn → Fe → Co → Ni → Cu → Zn
परमाणु क्रमांक:
21 → 30
4. 3d-श्रेणी का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
सामान्य क्रम है:
Sc: [Ar] 3d¹ 4s²
Ti: [Ar] 3d² 4s²
V: [Ar] 3d³ 4s²
Cr: [Ar] 3d⁵ 4s¹
Mn: [Ar] 3d⁵ 4s²
Fe: [Ar] 3d⁶ 4s²
Co: [Ar] 3d⁷ 4s²
Ni: [Ar] 3d⁸ 4s²
Cu: [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
Zn: [Ar] 3d¹⁰ 4s²
महत्वपूर्ण अपवाद: Cr और Cu
Cr का अपेक्षित विन्यास:
[Ar] 3d⁴ 4s²
वास्तविक विन्यास:
[Ar] 3d⁵ 4s¹
Cu का अपेक्षित विन्यास:
[Ar] 3d⁹ 4s²
वास्तविक विन्यास:
[Ar] 3d¹⁰ 4s¹
इसका कारण अर्ध-भरे d⁵ और पूर्ण-भरे d¹⁰ उपकोश की अतिरिक्त स्थिरता है।
5. संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों प्रदर्शित करते हैं?
यह इस अध्याय की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है।
ns और (n−1)d इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जाएँ अपेक्षाकृत निकट होती हैं। इसलिए दोनों उपकोशों के इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
इसके परिणामस्वरूप संक्रमण तत्व एक से अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण: लोहा
Fe:
[Ar] 3d⁶ 4s²
यह निम्न प्रकार से इलेक्ट्रॉन खो सकता है:
- 2 इलेक्ट्रॉन → Fe²⁺
- 3 इलेक्ट्रॉन → Fe³⁺
इसलिए लोहे की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
+2 और +3
3d तत्वों की महत्वपूर्ण ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
| तत्व | महत्वपूर्ण ऑक्सीकरण अवस्थाएँ |
|---|---|
| Sc | +3 |
| Ti | +2, +3, +4 |
| V | +2, +3, +4, +5 |
| Cr | +2, +3, +6 |
| Mn | +2, +3, +4, +6, +7 |
| Fe | +2, +3 |
| Co | +2, +3 |
| Ni | +2, +3 |
| Cu | +1, +2 |
| Zn | +2 |
महत्वपूर्ण अवलोकन
पहली संक्रमण श्रेणी में अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था Sc से Mn तक बढ़ती है और उसके बाद सामान्यतः घटती है।
मैंगनीज +7 तक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है क्योंकि इसमें कुल सात संयोजकता इलेक्ट्रॉन उपलब्ध होते हैं:
Mn = 3d⁵ 4s²
6. +2 ऑक्सीकरण अवस्था सामान्य क्यों है?
अनेक प्रथम-पंक्ति संक्रमण तत्वों में सबसे पहले 4s इलेक्ट्रॉन निकलते हैं।
उदाहरण:
Fe → Fe²⁺ + 2e⁻
Fe:
[Ar] 3d⁶ 4s²
Fe²⁺:
[Ar] 3d⁶
इसलिए +2 ऑक्सीकरण अवस्था सामान्य है।
महत्वपूर्ण उदाहरण: Sc
Sc³⁺ का विन्यास:
Sc³⁺ = [Ar]
Sc ने दोनों 4s इलेक्ट्रॉन और एक 3d इलेक्ट्रॉन खोया है।
7. संक्रमण तत्व रंगीन क्यों होते हैं?
कई संक्रमण धातु आयनों के रंगीन होने का कारण d–d इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण है।
जब प्रकाश किसी संक्रमण धातु आयन पर पड़ता है, तो इलेक्ट्रॉन एक d-ऊर्जा स्तर से दूसरे d-ऊर्जा स्तर पर जाने के लिए दृश्य प्रकाश की किसी विशेष तरंगदैर्ध्य की ऊर्जा अवशोषित कर सकता है।
बचा हुआ परावर्तित या संचारित प्रकाश हमें यौगिक का रंग दिखाई देता है।
उदाहरण
Cu²⁺ के यौगिक प्रायः नीले या नीले-हरे दिखाई देते हैं।
MnO₄⁻ का रंग बैंगनी होता है, लेकिन इसका रंग मुख्यतः आवेश-स्थानांतरण संक्रमण (charge-transfer transition) के कारण होता है, केवल d–d संक्रमण के कारण नहीं।
महत्वपूर्ण अपवाद
d⁰ या d¹⁰ विन्यास वाले आयनों में सामान्यतः d–d संक्रमण नहीं होता।
उदाहरण:
- Sc³⁺ → d⁰ → रंगहीन
- Ti⁴⁺ → d⁰ → रंगहीन
- Zn²⁺ → d¹⁰ → रंगहीन
- Cu⁺ → d¹⁰ → सामान्यतः रंगहीन
सामान्य भ्रम: प्रत्येक रंगीन संक्रमण धातु यौगिक का रंग d–d संक्रमण के कारण नहीं होता। Charge-transfer transition भी तीव्र रंग उत्पन्न कर सकते हैं।
8. संक्रमण तत्व अनुचुंबकीय क्यों होते हैं?
जब किसी पदार्थ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (unpaired electrons) होते हैं, तो वह अनुचुंबकीय हो सकता है।
चुंबकीय आघूर्ण के लिए:
μ = √[n(n + 2)] BM
जहाँ:
- μ = चुंबकीय आघूर्ण
- n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
- BM = Bohr Magneton
उदाहरण
Fe³⁺:
Fe:
[Ar] 3d⁶ 4s²
Fe³⁺:
[Ar] 3d⁵
इसमें 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
इसलिए:
μ = √[5(5 + 2)]
μ = √35 BM
महत्वपूर्ण बात
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होने पर सामान्यतः अनुचुंबकीय गुण अधिक प्रबल होता है।
9. संक्रमण तत्व संकुल यौगिक क्यों बनाते हैं?
संक्रमण धातु आयनों में निम्न गुण होते हैं:
- छोटा आकार
- अपेक्षाकृत अधिक आवेश
- रिक्त कक्षक
- लिगैंड से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करने की क्षमता
इसलिए वे आसानी से समन्वय यौगिक (coordination compounds) बनाते हैं।
उदाहरण
[Cu(NH₃)₄]²⁺
यहाँ:
- Cu²⁺ = केंद्रीय धातु आयन
- NH₃ = लिगैंड
- चार NH₃ अणु Cu²⁺ के साथ समन्वय करते हैं।
दूसरा उदाहरण:
[Fe(CN)₆]⁴⁻
यहाँ CN⁻ आयन लिगैंड के रूप में कार्य करते हैं।
10. संक्रमण तत्व अच्छे उत्प्रेरक क्यों होते हैं?
संक्रमण धातुएँ और उनके यौगिक अक्सर अच्छे उत्प्रेरक (catalysts) होते हैं क्योंकि वे:
- परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित कर सकते हैं।
- मध्यवर्ती यौगिक बना सकते हैं।
- अपनी सतह पर अभिकारकों का अधिशोषण कर सकते हैं।
- इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण को आसान बना सकते हैं।
उदाहरण
Fe का उपयोग Haber प्रक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है:
N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃
V₂O₅ का उपयोग Contact प्रक्रिया में किया जाता है:
2SO₂ + O₂ ⇌ 2SO₃
Ni का उपयोग हाइड्रोजनीकरण अभिक्रियाओं में किया जाता है:
RCH=CHR + H₂ → RCH₂–CH₂R
परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था का लाभ
उत्प्रेरक अभिक्रिया के दौरान अस्थायी रूप से अपनी ऑक्सीकरण अवस्था बदल सकता है और बाद में फिर अपनी मूल अवस्था में लौट सकता है।
11. मिश्रधातु निर्माण
संक्रमण धातुएँ एक-दूसरे के साथ आसानी से मिश्रधातुएँ (alloys) बनाती हैं क्योंकि इनके परमाणु आकार अपेक्षाकृत समान होते हैं।
मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं अथवा धातु और किसी अन्य तत्व का मिश्रण है, जिसमें उपयोगी गुण प्राप्त होते हैं।
उदाहरण:
- Steel → Fe + C
- Stainless steel → Fe + Cr + Ni + C
- Brass → Cu + Zn
- Bronze → Cu + Sn
मिश्रधातुओं में बेहतर:
- मजबूती
- कठोरता
- संक्षारण प्रतिरोध
- तापीय गुण
प्राप्त किए जा सकते हैं।
12. अंतःस्थलीय यौगिक
संक्रमण धातुएँ H, B, C और N जैसे छोटे परमाणुओं को अपने क्रिस्टल जालक के रिक्त स्थानों या interstices में समाहित करके यौगिक बना सकती हैं।
इन्हें अंतःस्थलीय यौगिक (interstitial compounds) कहते हैं।
उदाहरण:
संक्रमण धातुओं के कार्बाइड और नाइट्राइड।
गुण
ये सामान्यतः:
- कठोर
- उच्च गलनांक वाले
- अपेक्षाकृत स्थिर
- विद्युत का चालन करने वाले
होते हैं।
13. प्रथम संक्रमण श्रेणी की प्रवृत्तियाँ
परमाणु त्रिज्या
3d श्रेणी में परमाणु त्रिज्या प्रारंभ में घटती है और फिर लगभग स्थिर हो जाती है।
इसका कारण है कि बढ़ते हुए नाभिकीय आवेश के साथ d-इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे को कुछ हद तक परिरक्षित करते हैं।
क्यों?
जैसे-जैसे नाभिकीय आवेश बढ़ता है:
- नाभिक और इलेक्ट्रॉनों के बीच आकर्षण बढ़ता है।
- d-इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे को कुछ हद तक परिरक्षित करते हैं।
इसलिए परमाणु आकार में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं होता।
आयनन एन्थैल्पी
संक्रमण श्रेणी में आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः बढ़ती है, लेकिन प्रवृत्ति पूरी तरह नियमित नहीं होती।
इस पर दो प्रमुख कारकों का प्रभाव होता है:
- बढ़ता नाभिकीय आवेश
- इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण
14. 3d श्रेणी में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
Mn तक अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है।
| तत्व | अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था |
|---|---|
| Sc | +3 |
| Ti | +4 |
| V | +5 |
| Cr | +6 |
| Mn | +7 |
Mn के बाद उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था सामान्यतः घटती है।
महत्वपूर्ण विचार
उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अधिक विद्युतऋणात्मक तत्वों, विशेषकर O और F, की उपस्थिति में अधिक स्थिर हो सकती हैं।
उदाहरण:
MnO₄⁻ → Mn(+7)
Cr₂O₇²⁻ → Cr(+6)
CrO₄²⁻ → Cr(+6)
15. Mn²⁺ विशेष रूप से स्थायी क्यों है?
Mn:
[Ar] 3d⁵ 4s²
Mn²⁺:
[Ar] 3d⁵
इसमें अर्ध-भरा d⁵ उपकोश होता है, जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है।
इसलिए Mn²⁺ अपेक्षाकृत स्थायी है।
महत्वपूर्ण प्रश्न
Mn²⁺, Mn³⁺ से अधिक स्थायी क्यों है?
Mn²⁺ में 3d⁵ अर्ध-भरी अवस्था है, जबकि Mn³⁺ में 3d⁴ विन्यास होता है।
16. Fe³⁺ अपेक्षाकृत स्थायी क्यों है?
Fe:
[Ar] 3d⁶ 4s²
Fe³⁺:
[Ar] 3d⁵
Fe³⁺ में अर्ध-भरा d⁵ उपकोश होता है, इसलिए इसे अतिरिक्त स्थायित्व मिलता है।
Fe²⁺:
[Ar] 3d⁶
इसलिए Fe³⁺ में विशेष रूप से स्थिर d⁵ विन्यास होता है।
17. Cu⁺ कुछ यौगिकों में स्थायी क्यों है?
Cu:
[Ar] 3d¹⁰ 4s¹
Cu⁺:
[Ar] 3d¹⁰
Cu⁺ में पूर्ण-भरा d-उपकोश होता है।
हालाँकि जलीय विलयन में Cu²⁺ सामान्यतः Cu⁺ की अपेक्षा अधिक स्थायी होता है क्योंकि जलयोजन एन्थैल्पी (hydration energy) Cu²⁺ को अधिक स्थायित्व प्रदान करती है।
यह अंतर परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
18. क्रोमियम के महत्वपूर्ण यौगिक
कक्षा 12 के लिए क्रोमियम के दो महत्वपूर्ण यौगिक हैं:
- पोटैशियम डाइक्रोमेट, K₂Cr₂O₇
- पोटैशियम क्रोमेट, K₂CrO₄
दोनों में Cr की ऑक्सीकरण अवस्था:
+6
18.1 क्रोमेट–डाइक्रोमेट साम्य
क्रोमेट आयन:
CrO₄²⁻
डाइक्रोमेट आयन:
Cr₂O₇²⁻
क्षारीय माध्यम में:
Cr₂O₇²⁻ + 2OH⁻ ⇌ 2CrO₄²⁻ + H₂O
अम्लीय माध्यम में:
2CrO₄²⁻ + 2H⁺ ⇌ Cr₂O₇²⁻ + H₂O
रंग
- क्रोमेट आयन → पीला
- डाइक्रोमेट आयन → नारंगी
याद रखने का सरल तरीका
अम्ल → डाइक्रोमेट → नारंगी
क्षार → क्रोमेट → पीला
19. ऑक्सीकारक के रूप में पोटैशियम डाइक्रोमेट
K₂Cr₂O₇ विशेष रूप से अम्लीय माध्यम में एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है।
अम्लीय विलयन में:
Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O
Cr की ऑक्सीकरण अवस्था:
+6 → +3
अर्थात डाइक्रोमेट इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है और अपचयित होता है।
Fe²⁺ का ऑक्सीकरण
Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6Fe²⁺ → 2Cr³⁺ + 7H₂O + 6Fe³⁺
यहाँ:
- Fe²⁺ → Fe³⁺ = ऑक्सीकरण
- Cr⁶⁺ → Cr³⁺ = अपचयन
20. पोटैशियम परमैंगनेट, KMnO₄
KMnO₄ में Mn की ऑक्सीकरण अवस्था:
+7
यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है।
इसका व्यवहार माध्यम पर निर्भर करता है।
20.1 अम्लीय माध्यम में KMnO₄
अम्लीय माध्यम में:
MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O
Mn की ऑक्सीकरण अवस्था:
+7 → +2
यह अम्लीय माध्यम में परमैंगनेट के अपचयन की महत्वपूर्ण अभिक्रिया है।
Fe²⁺ का ऑक्सीकरण
MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5Fe²⁺ → Mn²⁺ + 4H₂O + 5Fe³⁺
20.2 उदासीन या दुर्बल क्षारीय माध्यम में KMnO₄
परमैंगनेट MnO₂ में अपचयित हो सकता है:
MnO₄⁻ + 2H₂O + 3e⁻ → MnO₂ + 4OH⁻
Mn की ऑक्सीकरण अवस्था:
+7 → +4
MnO₂ एक भूरा/काला ठोस है।
20.3 प्रबल क्षारीय माध्यम में KMnO₄
परमैंगनेट मैंगनेट बना सकता है:
MnO₄⁻ + e⁻ → MnO₄²⁻
Mn की ऑक्सीकरण अवस्था:
+7 → +6
मैंगनेट आयन हरे रंग का होता है।
इसलिए याद रखें:
| माध्यम | मुख्य Mn उत्पाद | ऑक्सीकरण अवस्था | सामान्य रंग |
|---|---|---|---|
| अम्लीय | Mn²⁺ | +2 | बहुत हल्का गुलाबी/लगभग रंगहीन |
| उदासीन/दुर्बल क्षारीय | MnO₂ | +4 | भूरा |
| प्रबल क्षारीय | MnO₄²⁻ | +6 | हरा |
21. लैंथेनाइड
वे तत्व जिनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में प्रवेश करता है, लैंथेनाइड कहलाते हैं।
ये आवर्त सारणी की छठी आवर्त की f-ब्लॉक श्रेणी से संबंधित हैं।
सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
[Xe] 4f⁰–¹⁴ 5d⁰–¹ 6s²
लैंथेनाइड श्रेणी को सामान्यतः:
La से Lu
तक माना जाता है।
इस श्रेणी में 4f कक्षकों में क्रमशः इलेक्ट्रॉन भरते जाते हैं।
22. लैंथेनाइड को आंतरिक संक्रमण तत्व क्यों कहते हैं?
इनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन बाहरी कोश के बजाय आंतरिक f-उपकोश में प्रवेश करता है।
इसी कारण लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड को आंतरिक संक्रमण तत्व (inner transition elements) कहा जाता है।
23. लैंथेनाइड की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था
लैंथेनाइड की सबसे सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था:
+3
होती है।
इस अवस्था में सामान्यतः:
- दो 6s इलेक्ट्रॉन
- तथा एक अतिरिक्त 5d या 4f इलेक्ट्रॉन
निकाला जाता है।
उदाहरण
La³⁺
Ce³⁺
Nd³⁺
Gd³⁺
Lu³⁺
23.1 +3 के अपवाद
कुछ लैंथेनाइड +2 या +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करते हैं।
Ce⁴⁺
Ce⁴⁺ अपेक्षाकृत स्थायी है क्योंकि इसमें रिक्त 4f उपकोश से संबंधित स्थायी इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था प्राप्त होती है।
Eu²⁺
Eu²⁺ में:
4f⁷
होता है।
यह अर्ध-भरा f-उपकोश है और इसलिए अपेक्षाकृत स्थायी है।
Yb²⁺
Yb²⁺ में:
4f¹⁴
होता है।
यह पूर्ण-भरा f-उपकोश है।
ये महत्वपूर्ण अपवाद हैं।
24. लैंथेनाइड संकुचन
यह अध्याय का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
परिभाषा
लैंथेनाइड श्रेणी में परमाणु तथा आयनिक त्रिज्या में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ होने वाली क्रमिक कमी को लैंथेनाइड संकुचन (lanthanoid contraction) कहते हैं।
यह क्यों होता है?
जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक बढ़ता है:
- नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
- इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में जुड़ते हैं।
- 4f इलेक्ट्रॉन नाभिकीय आवेश का प्रभावी परिरक्षण बहुत कम करते हैं।
इसलिए प्रभावी नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है।
परिणामस्वरूप:
परमाणु/आयनिक आकार धीरे-धीरे घटता है।
25. लैंथेनाइड संकुचन के परिणाम
25.1 लैंथेनाइडों में समानता
आयनिक त्रिज्या में परिवर्तन धीरे-धीरे होता है, इसलिए लैंथेनाइडों के रासायनिक गुण बहुत समान होते हैं।
इसी कारण उनका पृथक्करण कठिन होता है।
25.2 4d और 5d तत्वों में समानता
लैंथेनाइड संकुचन के कारण कुछ 4d और 5d तत्वों का आकार बहुत समान हो जाता है।
उदाहरण:
Zr और Hf
इनकी परमाणु त्रिज्याएँ बहुत समान होती हैं।
इसलिए इनके रासायनिक गुण भी काफी समान होते हैं।
25.3 हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीयता
लैंथेनाइड हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीयता श्रेणी में सामान्यतः घटती है।
आयन का आकार घटने पर Ln³⁺ की आवेश घनत्व बढ़ती है।
इसलिए Ln–O आकर्षण अधिक मजबूत होता है और हाइड्रॉक्साइड की क्षारीयता घटती है।
सामान्य प्रवृत्ति:
La(OH)₃ > … > Lu(OH)₃
क्षारीयता के संदर्भ में।
26. लैंथेनाइड आयनों का रंग
कई लैंथेनाइड आयन f–f संक्रमण के कारण रंगीन होते हैं।
इनका रंग अनेक संक्रमण धातु आयनों की तुलना में कम तीव्र होता है क्योंकि f–f संक्रमण अपेक्षाकृत कम तीव्र होते हैं।
महत्वपूर्ण बात
f⁰ और f¹⁴ विन्यास वाले लैंथेनाइड आयन सामान्यतः रंगहीन होते हैं।
उदाहरण:
La³⁺ → 4f⁰ → रंगहीन
Lu³⁺ → 4f¹⁴ → रंगहीन
27. लैंथेनाइड के चुंबकीय गुण
लैंथेनाइड आयन 4f कक्षकों में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय हो सकते हैं।
इनका चुंबकीय व्यवहार मुख्य रूप से f-इलेक्ट्रॉनों से प्रभावित होता है।
कक्षा 12 के लिए याद रखें:
अधिक अयुग्मित f-इलेक्ट्रॉन सामान्यतः अधिक प्रबल अनुचुंबकीय व्यवहार देते हैं।
28. ऐक्टिनाइड
वे तत्व जिनमें विभेदी इलेक्ट्रॉन 5f उपकोश में प्रवेश करता है, ऐक्टिनाइड कहलाते हैं।
ये आवर्त सारणी की सातवीं आवर्त की f-ब्लॉक श्रेणी से संबंधित हैं।
सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
[Rn] 5f⁰–¹⁴ 6d⁰–¹ 7s²
श्रृंखला को सामान्यतः:
Ac से Lr
तक माना जाता है।
29. ऐक्टिनाइडों की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
लैंथेनाइडों की तुलना में ऐक्टिनाइड अधिक परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
+3, +4, +5, +6
कुछ ऐक्टिनाइड इससे भी उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखा सकते हैं।
ऐसा क्यों होता है?
5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाएँ अपेक्षाकृत निकट होती हैं।
इसलिए इन कक्षकों के इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
30. ऐक्टिनाइड अधिक क्रियाशील क्यों हैं?
5f कक्षक, 4f कक्षकों की तुलना में अधिक विस्तृत होते हैं।
इसलिए 5f इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में अधिक आसानी से भाग ले सकते हैं।
इसके कारण:
- अधिक परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
- अधिक रासायनिक क्रियाशीलता
- संकुल बनाने की अधिक प्रवृत्ति
देखी जाती है।
31. ऐक्टिनाइड संकुचन
लैंथेनाइडों की तरह ऐक्टिनाइडों में भी परमाणु और आयनिक त्रिज्या में क्रमिक कमी होती है।
इसे ऐक्टिनाइड संकुचन कहते हैं।
इसका मुख्य कारण है:
5f इलेक्ट्रॉनों का बढ़ते नाभिकीय आवेश को प्रभावी रूप से परिरक्षित न कर पाना।
32. लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड में अंतर
| गुण | लैंथेनाइड | ऐक्टिनाइड |
|---|---|---|
| भरा जाने वाला उपकोश | 4f | 5f |
| आवर्त | 6 | 7 |
| सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था | +3 | +3 |
| परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ | कम | अधिक |
| रेडियोधर्मिता | अधिकांश स्थायी समस्थानिक; Pm रेडियोधर्मी | सभी रेडियोधर्मी |
| संकुचन | लैंथेनाइड संकुचन | ऐक्टिनाइड संकुचन |
| संकुल निर्माण | तुलनात्मक रूप से कम | सामान्यतः अधिक |
| f-इलेक्ट्रॉनों की भागीदारी | 4f इलेक्ट्रॉन अधिक आंतरिक | 5f इलेक्ट्रॉन अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध |
33. ऐक्टिनाइडों की रसायन अधिक जटिल क्यों है?
5f कक्षक 4f कक्षकों की तुलना में अधिक विस्तृत होते हैं।
इसलिए 5f इलेक्ट्रॉन अधिक आसानी से:
- बंध निर्माण
- संकुल निर्माण
- परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाओं
में भाग ले सकते हैं।
इसी कारण ऐक्टिनाइडों की रसायन लैंथेनाइडों की तुलना में अधिक जटिल होती है।
34. संक्रमण तत्व और आंतरिक संक्रमण तत्व में अंतर
| विशेषता | संक्रमण तत्व | आंतरिक संक्रमण तत्व |
|---|---|---|
| विभेदी इलेक्ट्रॉन | d-कक्षक | f-कक्षक |
| मुख्य श्रेणी | d-ब्लॉक | f-ब्लॉक |
| उदाहरण | Fe, Co, Ni | Ce, Nd, U |
| परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ | सामान्य | विशेष रूप से ऐक्टिनाइडों में सामान्य |
| रंगीन आयन | सामान्य | अनेक आयन रंगीन |
| संकुल निर्माण | प्रबल प्रवृत्ति | संकुल बना सकते हैं |
35. महत्वपूर्ण NCERT-आधारित तथ्य
- Zn, Cd और Hg d-ब्लॉक के तत्व हैं, लेकिन संक्रमण तत्व नहीं हैं।
- संक्रमण तत्वों के परमाणु या सामान्य आयनों में अपूर्ण d-उपकोश होता है।
- Cr और Cu के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपवाद हैं।
- संक्रमण तत्व सामान्यतः परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
- अनेक संक्रमण धातु आयन रंगीन होते हैं।
- d⁰ और d¹⁰ आयन सामान्यतः d–d संक्रमण नहीं दिखाते।
- संक्रमण तत्व अच्छे उत्प्रेरक हो सकते हैं।
- संक्रमण तत्व मिश्रधातु तथा अंतःस्थलीय यौगिक बनाते हैं।
- Mn²⁺ = 3d⁵ विशेष रूप से स्थायी है।
- Fe³⁺ = 3d⁵ विशेष रूप से स्थायी है।
- Cu⁺ = 3d¹⁰ में पूर्ण-भरा d-उपकोश होता है।
- क्रोमेट आयन पीला होता है।
- डाइक्रोमेट आयन नारंगी होता है।
- परमैंगनेट आयन बैंगनी होता है।
- मैंगनेट आयन हरा होता है।
- MnO₂ भूरा/काला होता है।
- लैंथेनाइड मुख्यतः +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
- लैंथेनाइड संकुचन का कारण 4f इलेक्ट्रॉनों का कम परिरक्षण प्रभाव है।
- ऐक्टिनाइड लैंथेनाइडों की तुलना में अधिक परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं।
- सभी ऐक्टिनाइड रेडियोधर्मी हैं।
36. विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ
गलती 1: Zn को संक्रमण तत्व कहना
यह गलत है।
Zn d-ब्लॉक का तत्व है, लेकिन Zn²⁺ में पूर्ण-भरा 3d¹⁰ विन्यास होता है।
गलती 2: सभी रंगीन संक्रमण धातु आयनों में d–d संक्रमण मान लेना
यह हमेशा सही नहीं है।
उदाहरण के लिए MnO₄⁻ का तीव्र रंग मुख्यतः charge-transfer transition के कारण होता है।
गलती 3: 3d इलेक्ट्रॉन को 4s इलेक्ट्रॉन से पहले निकालना
संक्रमण धातु के धनायन बनाते समय सामान्यतः 4s इलेक्ट्रॉन पहले निकलते हैं और उसके बाद 3d इलेक्ट्रॉन।
उदाहरण:
Fe:
[Ar] 3d⁶ 4s²
Fe²⁺:
[Ar] 3d⁶
न कि 3d⁴ 4s²।
गलती 4: ऑक्सीकरण अवस्था और d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या को एक ही समझना
उदाहरण:
Fe²⁺ = 3d⁶
Fe³⁺ = 3d⁵
ऑक्सीकरण अवस्था यह बताती है कि उदासीन परमाणु की तुलना में कितने इलेक्ट्रॉन खोए गए हैं। d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए मूल परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को ध्यान में रखना पड़ता है।
गलती 5: क्रोमेट और डाइक्रोमेट को उल्टा याद करना
- CrO₄²⁻ → पीला
- Cr₂O₇²⁻ → नारंगी
गलती 6: KMnO₄ अभिक्रिया में माध्यम को भूल जाना
अपचयन उत्पाद माध्यम के अनुसार बदलता है:
- अम्लीय → Mn²⁺
- उदासीन/दुर्बल क्षारीय → MnO₂
- प्रबल क्षारीय → MnO₄²⁻
37. बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न
1. संक्रमण तत्व की परिभाषा दीजिए।
संक्रमण तत्व वह तत्व है जिसके परमाणु या उसके कम-से-कम एक आयन में अपूर्ण d-उपकोश उपस्थित होता है।
2. Zn संक्रमण तत्व क्यों नहीं है?
Zn और Zn²⁺ दोनों में पूर्ण-भरा 3d¹⁰ विन्यास होता है। इसलिए Zn संक्रमण तत्व की परिभाषा को पूरा नहीं करता।
3. संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों प्रदर्शित करते हैं?
क्योंकि ns और (n−1)d कक्षकों की ऊर्जाएँ अपेक्षाकृत निकट होती हैं और दोनों के इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
4. संक्रमण धातु आयन रंगीन क्यों होते हैं?
सामान्यतः d-कक्षकों के बीच इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण के कारण। Charge-transfer transition भी रंग उत्पन्न कर सकता है।
5. Mn²⁺ विशेष रूप से स्थायी क्यों है?
Mn²⁺ में 3d⁵ अर्ध-भरा d-उपकोश होता है, जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है।
6. Fe³⁺ अपेक्षाकृत स्थायी क्यों है?
Fe³⁺ का विन्यास 3d⁵ है। अर्ध-भरा d-उपकोश इसे अतिरिक्त स्थायित्व देता है।
7. संक्रमण तत्व अच्छे उत्प्रेरक क्यों हैं?
वे परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखा सकते हैं, मध्यवर्ती यौगिक बना सकते हैं और अभिकारकों का अधिशोषण कर सकते हैं।
8. लैंथेनाइड संकुचन क्या है?
लैंथेनाइड श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु तथा आयनिक त्रिज्या में होने वाली क्रमिक कमी को लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं।
9. लैंथेनाइड संकुचन के दो परिणाम लिखिए।
- लैंथेनाइडों के समान रासायनिक गुणों के कारण उनका पृथक्करण कठिन होता है।
- Zr और Hf की त्रिज्याएँ तथा रासायनिक गुण बहुत समान होते हैं।
10. ऐक्टिनाइड लैंथेनाइडों से अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों दिखाते हैं?
क्योंकि 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाएँ अपेक्षाकृत निकट होती हैं।
38. NEET/JEE के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाएँ
वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं के लिए निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:
- Cr: 3d⁵ 4s¹
- Cu: 3d¹⁰ 4s¹
- Zn संक्रमण तत्व नहीं है।
- Mn²⁺ → d⁵
- Fe³⁺ → d⁵
- Cu⁺ → d¹⁰
- Sc³⁺ → d⁰
- Zn²⁺ → d¹⁰
- पहली संक्रमण श्रेणी में Mn की सामान्य अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था +7 है।
- d⁰ और d¹⁰ आयन सामान्यतः d–d संक्रमण नहीं दिखाते।
- क्रोमेट–डाइक्रोमेट साम्य माध्यम के pH पर निर्भर करता है।
- KMnO₄ का अपचयन उत्पाद माध्यम पर निर्भर करता है।
- लैंथेनाइड संकुचन का कारण 4f इलेक्ट्रॉनों का कम परिरक्षण प्रभाव है।
- ऐक्टिनाइड अधिक परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं।
- Zr और Hf की समानता लैंथेनाइड संकुचन से संबंधित है।
39. अभ्यास प्रश्न
इन प्रश्नों को पहले बिना नोट्स देखे हल करने का प्रयास करें।
अवधारणात्मक प्रश्न
- Zn को d-ब्लॉक तत्व लेकिन संक्रमण तत्व क्यों नहीं माना जाता?
- संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों प्रदर्शित करते हैं?
- संक्रमण धातु यौगिक रंगीन क्यों होते हैं?
- Mn²⁺ विशेष रूप से स्थायी क्यों है?
- Fe³⁺ अपेक्षाकृत स्थायी क्यों है?
- संक्रमण धातुएँ समन्वय यौगिक क्यों बनाती हैं?
- संक्रमण तत्व मिश्रधातुएँ क्यों बनाते हैं?
- लैंथेनाइड संकुचन का कारण क्या है?
- ऐक्टिनाइड लैंथेनाइडों की तुलना में अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों दिखाते हैं?
- समझाइए कि Zr और Hf के गुण समान क्यों हैं।
अभिक्रिया-आधारित प्रश्न
- अम्लीय माध्यम में परमैंगनेट के अपचयन की अर्ध-अभिक्रिया को पूर्ण एवं संतुलित कीजिए।
- अम्लीय माध्यम में Fe²⁺ और MnO₄⁻ के बीच अभिक्रिया लिखिए।
- अम्लीय माध्यम में क्रोमेट–डाइक्रोमेट साम्य लिखिए।
- क्षारीय माध्यम में क्रोमेट–डाइक्रोमेट साम्य लिखिए।
- अम्लीय, उदासीन तथा प्रबल क्षारीय माध्यम में KMnO₄ के अपचयन उत्पाद समझाइए।
संख्यात्मक/अनुप्रयोग आधारित प्रश्न
- ऐसे आयन का spin-only चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए जिसमें तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
सूत्र:
μ = √[n(n + 2)] BM
उत्तर
n = 3
μ = √[3(3 + 2)]
μ = √15 BM
40. 20 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. निम्नलिखित में से कौन d-ब्लॉक का तत्व है लेकिन संक्रमण तत्व नहीं है?
(A) Fe
(B) Cu
(C) Zn
(D) Mn
सही उत्तर: (C) Zn
Zn और Zn²⁺ में पूर्ण-भरा 3d¹⁰ विन्यास होता है।
2. क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है:
(A) [Ar] 3d⁴ 4s²
(B) [Ar] 3d⁵ 4s¹
(C) [Ar] 3d³ 4s³
(D) [Ar] 3d⁶ 4s⁰
सही उत्तर: (B) [Ar] 3d⁵ 4s¹
Cr को अर्ध-भरे 3d⁵ विन्यास से अतिरिक्त स्थायित्व प्राप्त होता है।
3. निम्नलिखित में से किस आयन का d⁵ विन्यास है?
(A) Fe²⁺
(B) Mn²⁺
(C) Cu²⁺
(D) Zn²⁺
सही उत्तर: (B) Mn²⁺
Mn²⁺ = [Ar] 3d⁵.
4. निम्नलिखित में से किस आयन का d¹⁰ विन्यास है?
(A) Fe³⁺
(B) Mn²⁺
(C) Cu⁺
(D) Cr³⁺
सही उत्तर: (C) Cu⁺
Cu⁺ = [Ar] 3d¹⁰.
5. डाइक्रोमेट आयन का रंग होता है:
(A) हरा
(B) नारंगी
(C) पीला
(D) बैंगनी
सही उत्तर: (B) नारंगी
Cr₂O₇²⁻ नारंगी रंग का होता है।
6. क्रोमेट आयन का रंग होता है:
(A) पीला
(B) नारंगी
(C) बैंगनी
(D) नीला
सही उत्तर: (A) पीला
CrO₄²⁻ पीले रंग का होता है।
7. अम्लीय माध्यम में MnO₄⁻ का अपचयन होकर बनता है:
(A) MnO₄²⁻
(B) MnO₂
(C) Mn²⁺
(D) Mn³⁺
सही उत्तर: (C) Mn²⁺
अम्लीय माध्यम में:
MnO₄⁻ → Mn²⁺
8. सामान्य यौगिकों में Mn की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है:
(A) +2
(B) +4
(C) +6
(D) +7
सही उत्तर: (D) +7
MnO₄⁻ में Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 है।
9. निम्नलिखित में से कौन-सा आयन d⁰ विन्यास के कारण सामान्यतः रंगहीन है?
(A) Ti⁴⁺
(B) Fe²⁺
(C) Cu²⁺
(D) Ni²⁺
सही उत्तर: (A) Ti⁴⁺
Ti⁴⁺ का d⁰ विन्यास है और d–d संक्रमण संभव नहीं है।
10. लैंथेनाइड संकुचन मुख्यतः किस कारण होता है?
(A) 4f इलेक्ट्रॉनों का प्रबल परिरक्षण
(B) 4f इलेक्ट्रॉनों का कमजोर परिरक्षण
(C) परमाणु द्रव्यमान में वृद्धि
(D) नाभिकीय आवेश में कमी
सही उत्तर: (B) 4f इलेक्ट्रॉनों का कमजोर परिरक्षण
4f इलेक्ट्रॉन बढ़ते नाभिकीय आवेश को प्रभावी रूप से परिरक्षित नहीं कर पाते।
11. लैंथेनाइड संकुचन के कारण किस युग्म के परमाणु आकार बहुत समान हैं?
(A) Na और K
(B) Mg और Ca
(C) Zr और Hf
(D) Li और Cs
सही उत्तर: (C) Zr और Hf
लैंथेनाइड संकुचन के कारण Hf का आकार Zr के बहुत निकट हो जाता है।
12. लैंथेनाइडों की सबसे सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था है:
(A) +1
(B) +2
(C) +3
(D) +6
सही उत्तर: (C) +3
अधिकांश लैंथेनाइड +3 अवस्था में पाए जाते हैं।
13. निम्नलिखित में से किस लैंथेनाइड आयन में विशेष रूप से स्थायी अर्ध-भरा 4f⁷ विन्यास है?
(A) Eu²⁺
(B) La³⁺
(C) Lu³⁺
(D) Ce⁴⁺
सही उत्तर: (A) Eu²⁺
Eu²⁺ में 4f⁷ विन्यास होता है, जो अर्ध-भरा f-उपकोश है।
14. निम्नलिखित में से किस आयन में पूर्ण-भरा f-उपकोश है?
(A) Eu²⁺
(B) Yb²⁺
(C) Ce³⁺
(D) Nd³⁺
सही उत्तर: (B) Yb²⁺
Yb²⁺ में 4f¹⁴ विन्यास होता है।
15. ऐक्टिनाइडों में ऑक्सीकरण अवस्थाओं की अधिक विविधता मुख्यतः किस कारण है?
(A) 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाएँ तुलनीय हैं
(B) इनमें f-इलेक्ट्रॉन नहीं होते
(C) 5f उपकोश पूर्ण-भरा होता है
(D) परमाणु आकार में कोई परिवर्तन नहीं होता
सही उत्तर: (A) 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाएँ तुलनीय हैं
इन कक्षकों के इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
16. प्रबल क्षारीय माध्यम में परमैंगनेट से बनने वाली हरी प्रजाति है:
(A) Mn²⁺
(B) MnO₂
(C) MnO₄²⁻
(D) Mn₂O₃
सही उत्तर: (C) MnO₄²⁻
मैंगनेट आयन MnO₄²⁻ हरे रंग का होता है।
17. Fe³⁺ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या कितनी है?
(A) 1
(B) 3
(C) 5
(D) 6
सही उत्तर: (C) 5
Fe³⁺ = [Ar] 3d⁵.
18. दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों वाले आयन का spin-only चुंबकीय आघूर्ण है:
(A) √3 BM
(B) √8 BM
(C) √15 BM
(D) √24 BM
सही उत्तर: (B) √8 BM
μ = √[2(2 + 2)] = √8 BM.
19. Haber प्रक्रिया में किस तत्व का उत्प्रेरक के रूप में उपयोग किया जाता है?
(A) Ni
(B) Fe
(C) Cu
(D) Zn
सही उत्तर: (B) Fe
अमोनिया के निर्माण में लौह-आधारित उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है।
20. संक्रमण तत्वों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(A) सभी d-ब्लॉक तत्व संक्रमण तत्व हैं।
(B) सभी संक्रमण तत्वों का विन्यास d⁰ होता है।
(C) संक्रमण तत्व सामान्यतः परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
(D) संक्रमण तत्व कभी संकुल नहीं बनाते।
सही उत्तर: (C) संक्रमण तत्व सामान्यतः परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
ns और (n−1)d कक्षकों की ऊर्जाओं की निकटता के कारण अलग-अलग संख्या में इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
41. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या सभी d-ब्लॉक तत्व संक्रमण तत्व हैं?
नहीं। Zn, Cd और Hg d-ब्लॉक के तत्व हैं, लेकिन संक्रमण तत्व नहीं हैं क्योंकि इनके परमाणु और सामान्य आयनों में d-उपकोश पूर्ण-भरा होता है।
2. संक्रमण धातु आयन प्रायः रंगीन क्यों होते हैं?
सामान्यतः d–d संक्रमण के कारण। Charge-transfer transition भी रंग उत्पन्न कर सकता है।
3. Zn²⁺ रंगहीन क्यों है?
Zn²⁺ का विन्यास 3d¹⁰ है। इसलिए इसमें d–d संक्रमण संभव नहीं है।
4. Sc³⁺ रंगहीन क्यों है?
Sc³⁺ का विन्यास 3d⁰ है। इसमें d–d संक्रमण के लिए d-इलेक्ट्रॉन उपस्थित नहीं हैं।
5. Mn की +7 ऑक्सीकरण अवस्था क्यों होती है?
Mn में 3d और 4s कक्षकों में कुल सात संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह MnO₄⁻ जैसे यौगिकों में +7 ऑक्सीकरण अवस्था दिखा सकता है।
6. KMnO₄ शक्तिशाली ऑक्सीकारक क्यों है?
Mn की +7 ऑक्सीकरण अवस्था बहुत उच्च होती है और यह आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित हो सकता है।
7. क्रोमेट और डाइक्रोमेट में क्या अंतर है?
क्रोमेट CrO₄²⁻ और पीले रंग का होता है, जबकि डाइक्रोमेट Cr₂O₇²⁻ और नारंगी रंग का होता है। इनकी सापेक्ष मात्रा विलयन की अम्लीयता/क्षारीयता पर निर्भर करती है।
8. लैंथेनाइड संकुचन का कारण क्या है?
बढ़ते नाभिकीय आवेश को 4f इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्रभावी रूप से परिरक्षित न कर पाने के कारण लैंथेनाइड संकुचन होता है।
9. लैंथेनाइडों को अलग करना कठिन क्यों होता है?
इनके आयनों के आकार बहुत समान होते हैं और अधिकांश +3 ऑक्सीकरण अवस्था में पाए जाते हैं। इसलिए इनके रासायनिक गुण बहुत समान होते हैं।
10. ऐक्टिनाइड लैंथेनाइडों की तुलना में अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों दिखाते हैं?
क्योंकि 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जाएँ अपेक्षाकृत निकट होती हैं, इसलिए अलग-अलग संख्या में इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग ले सकते हैं।
42. त्वरित पुनरावृत्ति: एक-पृष्ठीय स्मरण नोट्स
d-ब्लॉक
सामान्य विन्यास:
(n−1)d¹–¹⁰ ns⁰–²
संक्रमण तत्व
परमाणु या आयन में अपूर्ण d-उपकोश होना चाहिए।
महत्वपूर्ण अपवाद
Cr = 3d⁵ 4s¹
Cu = 3d¹⁰ 4s¹
प्रमुख गुण
संक्रमण तत्व प्रदर्शित करते हैं:
- परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
- रंगीन आयन
- अनुचुंबकत्व
- संकुल निर्माण
- उत्प्रेरकीय सक्रियता
- मिश्रधातु निर्माण
- अंतःस्थलीय यौगिक
महत्वपूर्ण स्थायी विन्यास
Mn²⁺ → d⁵
Fe³⁺ → d⁵
Cu⁺ → d¹⁰
Sc³⁺ → d⁰
Zn²⁺ → d¹⁰
क्रोमियम
CrO₄²⁻ → पीला
Cr₂O₇²⁻ → नारंगी
अम्ल डाइक्रोमेट को और क्षार क्रोमेट को अनुकूल करता है।
परमैंगनेट
अम्लीय → Mn²⁺
उदासीन/दुर्बल क्षारीय → MnO₂
प्रबल क्षारीय → MnO₄²⁻
लैंथेनाइड
4f भरना
सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था:
+3
मुख्य अवधारणा:
लैंथेनाइड संकुचन
कारण:
4f इलेक्ट्रॉनों का कमजोर परिरक्षण प्रभाव
ऐक्टिनाइड
5f भरना
सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था:
+3
अधिक परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
सभी ऐक्टिनाइड रेडियोधर्मी हैं।
अंतिम परीक्षा जाँच-सूची
कक्षा 12 की रसायन विज्ञान परीक्षा से पहले सुनिश्चित करें कि आप इन प्रश्नों का उत्तर आसानी से दे सकें:
- संक्रमण तत्व क्या है?
- Zn संक्रमण तत्व क्यों नहीं है?
- संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों प्रदर्शित करते हैं?
- संक्रमण धातु यौगिक रंगीन क्यों होते हैं?
- μ = √[n(n+2)] BM से चुंबकीय आघूर्ण की गणना कैसे करते हैं?
- संक्रमण तत्वों की उत्प्रेरकीय सक्रियता समझाइए।
- Cr, Cu, Mn²⁺ और Fe³⁺ के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
- क्रोमेट–डाइक्रोमेट साम्य समझाइए।
- KMnO₄ और K₂Cr₂O₇ से संबंधित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए।
- KMnO₄ पर अम्लीय, उदासीन और क्षारीय माध्यम का प्रभाव समझाइए।
- लैंथेनाइड संकुचन की परिभाषा और कारण लिखिए।
- लैंथेनाइड संकुचन के परिणाम समझाइए।
- लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड की तुलना कीजिए।
- ऐक्टिनाइड अधिक परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों दिखाते हैं?
यदि ये अवधारणाएँ स्पष्ट हैं, तो यह अध्याय काफी आसान हो जाता है क्योंकि इसके अधिकांश अलग-अलग लगने वाले तथ्य—रंग, चुंबकीय व्यवहार, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, उत्प्रेरकीय सक्रियता और संकुल निर्माण—इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा कक्षकों की ऊर्जाओं से आपस में जुड़े हुए हैं।
