प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) – NEET Notes
प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा
प्रकाश संश्लेषण (Gk. photon = प्रकाश, synthesis = एकत्र करना) पृथ्वी पर होने वाली सबसे महत्वपूर्ण उपचयी (Anabolic) प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हरे पौधे (स्वपोषी जीव) प्रकाश ऊर्जा की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल जैसे सरल पदार्थों से जटिल कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं तथा वायुमंडल को शुद्ध बनाते हैं क्योंकि वे CO₂ का उपभोग करते हैं और O₂ मुक्त करते हैं।
प्रकाश संश्लेषण को इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है:
हरे पौधों के हरे भागों द्वारा प्रकाश या विकिरण ऊर्जा (Photonic Energy) को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करना, जो कार्बोहाइड्रेट अणुओं के उच्च-ऊर्जा बंधों में संचित रहती है, प्रकाश संश्लेषण कहलाता है।
प्रकाश संश्लेषण का महत्व
- यह पृथ्वी की सबसे महत्वपूर्ण उपचयी प्रक्रिया है।
- हरे पौधों एवं शैवालों में होती है।
- कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन का निर्माण करती है।
- प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलती है।
- वायुमंडल को शुद्ध करती है।
- ऑक्सीजन का उत्सर्जन करती है।
प्रकाश संश्लेषण का समीकरण
उच्च पादपों एवं शैवालों में प्रकाश संश्लेषण का सरल समीकरण:
6CO2 + 12H2O + Light + Chlorophyll -> C6H12O6 + 6O2 + 6H2O
शब्दों में समीकरण
कार्बन डाइऑक्साइड + जल + प्रकाश + क्लोरोफिल → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन + जल

प्रकाश संश्लेषण एवं प्रकाश स्वपोषण (Photoautotrophism)
- प्रकाश संश्लेषण को प्रकाश स्वपोषण (Photoautotrophism) कहा जाता है।
- जो पौधे प्रकाश संश्लेषण करते हैं उन्हें प्रकाश स्वपोषी (Photoautotrophs) कहते हैं।
प्रकाश स्वपोषी (Photoautotrophs)
वे जीव जो प्रकाश ऊर्जा की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
उदाहरण
- हरे पौधे
- शैवाल
स्वपोषी एवं परपोषी
स्वपोषी (Autotrophs)
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी कहलाते हैं।
प्रकार
- प्रकाश स्वपोषी (Photoautotrophs)
- रसायन स्वपोषी (Chemoautotrophs)
परपोषी (Heterotrophs)
वे जीव जो भोजन के लिए स्वपोषियों पर निर्भर रहते हैं, परपोषी कहलाते हैं।
शाकाहारी (Herbivores)
वे परपोषी जो पूर्णतः प्रकाश स्वपोषियों पर निर्भर रहते हैं, शाकाहारी (Vegetarians) कहलाते हैं।
रसायन संश्लेषण (Chemosynthesis)
परिभाषा
कुछ जीवाणुओं द्वारा अकार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण से प्राप्त रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करके कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करना रसायन संश्लेषण कहलाता है।
रसायन स्वपोषी (Chemoautotrophs)
जो जीवाणु रसायन संश्लेषण करते हैं उन्हें रसायन स्वपोषी या रसायन संश्लेषी जीवाणु कहते हैं।
उदाहरण
- नाइट्रीकरण जीवाणु (Nitrifying bacteria)
प्रकाश संश्लेषण एवं रसायन संश्लेषण में अंतर
| आधार | प्रकाश संश्लेषण | रसायन संश्लेषण |
|---|---|---|
| ऊर्जा का स्रोत | प्रकाश ऊर्जा | रासायनिक ऊर्जा |
| किसमें होता है | हरे पौधों एवं शैवालों में | कुछ जीवाणुओं में |
| क्लोरोफिल | आवश्यक | उल्लेख नहीं |
| भोजन निर्माण | कार्बोहाइड्रेट बनते हैं | कार्बनिक पदार्थ बनते हैं |
| जीवों का प्रकार | प्रकाश स्वपोषी | रसायन स्वपोषी |
NEET के लिए महत्वपूर्ण शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्रकाश संश्लेषण | प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलना |
| प्रकाश स्वपोषी | प्रकाश से भोजन बनाने वाले जीव |
| रसायन संश्लेषण | रासायनिक ऊर्जा से भोजन निर्माण |
| रसायन स्वपोषी | रासायनिक ऊर्जा से भोजन बनाने वाले जीव |
| स्वपोषी | अपना भोजन स्वयं बनाने वाले जीव |
| परपोषी | दूसरों पर निर्भर रहने वाले जीव |
| शाकाहारी | पौधों पर निर्भर परपोषी |
NEET Quick Revision Points
- प्रकाश संश्लेषण सबसे महत्वपूर्ण उपचयी प्रक्रिया है।
- क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
- प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
- प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन मुक्त होती है।
- यह वायुमंडल को शुद्ध करता है।
- हरे पौधे एवं शैवाल प्रकाश स्वपोषी हैं।
- नाइट्रीकरण जीवाणु रसायन स्वपोषी होते हैं।
- शाकाहारी पूर्णतः प्रकाश स्वपोषियों पर निर्भर होते हैं।
One Line Facts for NEET
- प्रकाश संश्लेषण = प्रकाश स्वपोषण
- रसायन स्वपोषी रसायन संश्लेषण करते हैं
- स्वपोषी अपना भोजन स्वयं बनाते हैं
- परपोषी स्वपोषियों पर निर्भर रहते हैं
- प्रकाश संश्लेषण की मुख्य विशेषता → प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन ।
विषमपोषी एवं मृतोपजीवी
मृतोपजीवी (Saprophytes)
वे विषमपोषी जीव जो मृत कार्बनिक पदार्थों पर जीवित रहते हैं, मृतोपजीवी कहलाते हैं।

मृतोपजीवियों का महत्व
- हरे पौधे निम्न के बिना जीवित रह सकते हैं:
- शाकाहारी (Herbivores)
- मांसाहारी (Carnivores)
- सर्वाहारी (Omnivores)
- लेकिन हरे पौधे प्रकृति में मृतोपजीवियों के बिना जीवित नहीं रह सकते क्योंकि:
- पौधों को आवश्यक कच्चे पदार्थ मृतोपजीवियों की क्रिया से प्राप्त होते हैं।
प्रकाश स्वपोषियों पर निर्भरता
- सभी विषमपोषी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रकाश स्वपोषियों पर निर्भर करते हैं।
- वायवीय जीवों के श्वसन हेतु आवश्यक ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण के दौरान मुक्त होती है।
सायनोबैक्टीरिया की भूमिका
- प्रारम्भ में वायुमंडल में ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत सायनोबैक्टीरिया थे।
- वायुमंडलीय ऑक्सीजन का संतुलन निरंतर निम्न प्रक्रियाओं द्वारा बना रहता है:
- प्रकाश संश्लेषण
- श्वसन
प्रकाश संश्लेषण का स्वभाव
उपचयी प्रक्रिया (Anabolic Process)
प्रकाश संश्लेषण एक उपचयी अथवा रचनात्मक प्रक्रिया है।
शुष्क भार में वृद्धि
प्रकाश संश्लेषण के कारण पौधों के शुष्क भार में वृद्धि होती है।
एण्डरगोनिक अभिक्रिया
प्रकाश संश्लेषण एक एण्डरगोनिक अभिक्रिया है।
ऊर्जा का अंतिम स्रोत
सभी जीवों के लिए ऊर्जा का अंतिम स्रोत सूर्य का प्रकाश है।
प्रकाश संश्लेषण एक ऑक्सीकरण-अपचयन प्रक्रिया
प्रकाश संश्लेषण एक ऑक्सीकरण-अपचयन (Oxidation-Reduction) प्रक्रिया है, जिसमें:
- जल का ऑक्सीकरण होता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन होता है।
प्रकाश संश्लेषण से संबंधित महत्वपूर्ण खोजें
| वैज्ञानिक | खोज |
|---|---|
| इंजेन-हाउज़ (Ingen-Housz) | प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है |
| थियोडोर डी सॉस्यूर | CO₂ तथा H₂O प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं |
| सेनेबियर | प्रकाश संश्लेषण में CO₂ का अवशोषण |
| जोसेफ प्रीस्टली | प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन मुक्त होती है |
| सेनेबियर (1782) | भोजन निर्माण में मुक्त ऑक्सीजन CO₂ से आती है |
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- मृतोपजीवी मृत कार्बनिक पदार्थों पर जीवित रहते हैं।
- पौधे मृतोपजीवियों के बिना प्रकृति में जीवित नहीं रह सकते।
- वायवीय श्वसन हेतु ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण से प्राप्त होती है।
- सायनोबैक्टीरिया प्रारंभिक ऑक्सीजन उत्पादक थे।
- प्रकाश संश्लेषण:
- उपचयी प्रक्रिया है
- रचनात्मक प्रक्रिया है
- एण्डरगोनिक अभिक्रिया है
- ऑक्सीकरण-अपचयन प्रक्रिया है
- प्रकाश संश्लेषण में जल का ऑक्सीकरण होता है।
- प्रकाश संश्लेषण में CO₂ का अपचयन होता है।
- सूर्य का प्रकाश सभी जीवों की ऊर्जा का अंतिम स्रोत है।
One-Line NCERT/NEET Facts
- मृतोपजीवी मृत कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं।
- प्रकाश संश्लेषण से पौधों का शुष्क भार बढ़ता है।
- प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है।
- प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन मुक्त होती है।
- सायनोबैक्टीरिया प्रारंभिक ऑक्सीजन उत्पादक थे।
- प्रकाश संश्लेषण एक एण्डरगोनिक प्रक्रिया है।
प्रकाश संश्लेषण से संबंधित महत्वपूर्ण खोजें
| वैज्ञानिक | खोज |
|---|---|
| ड्यूट्रोशे (Dutrochet, 1937) | क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है |
| लीबिग (Liebig, 1840) | पौधों में कार्बन का एकमात्र स्रोत CO₂ है |
| जूलियस सैक्स | प्रकाश संश्लेषण का स्थान क्लोरोप्लास्ट है तथा स्टार्च प्रथम दृश्यमान उत्पाद है |
| रॉबर्ट मेयर | प्रकाश को ऊर्जा स्रोत के रूप में पहचाना |
प्रकाश संश्लेषण का स्थान
- प्रकाश संश्लेषण मुख्यतः पत्तियों की मध्यपर्णी कोशिकाओं (Mesophyll cells) में होता है।
- बहुत कम मात्रा में यह निम्न भागों में भी होता है:
- हरे तने
- पुष्पीय भाग (विशेषकर बाह्यदल/सेपल)
मध्यपर्णी कोशिकाएँ
- मध्यपर्णी कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट उपस्थित होते हैं।
- क्लोरोप्लास्ट कोशिका की बाहरी सीमा के साथ व्यवस्थित रहते हैं।
क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast)
परिभाषा
क्लोरोप्लास्ट हरे प्लास्टिड होते हैं जो पौधों के सभी हरे भागों में पाए जाते हैं।
- Greek:
- chloros = हरा
- plastos = निर्मित
क्लोरोप्लास्ट का महत्व
- क्लोरोप्लास्ट को कोशिका का भोजन निर्माण केंद्र कहा जाता है।
- इन्हें:
- Assimilatory centres
- Photosynthetic factories
भी कहा जाता है।
मुख्य कार्य
- प्रकाश संश्लेषण का वास्तविक स्थान क्लोरोप्लास्ट है।
क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित वर्णक
क्लोरोप्लास्ट में निम्न वर्णक पाए जाते हैं:
- क्लोरोफिल
- कैरोटेनॉइड
कार्य
ये वर्णक प्रकाश संश्लेषण हेतु आवश्यक प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं।
क्लोरोप्लास्ट की उपस्थिति एवं आकार
- अधिकांश क्लोरोप्लास्ट पत्तियों की मध्यपर्णी कोशिकाओं में पाए जाते हैं।
आकार
क्लोरोप्लास्ट निम्न प्रकार के हो सकते हैं:
- लेंसाकार
- अंडाकार
- गोलाकार
- चकतीनुमा
- फीतेनुमा
आकारमान
- लंबाई: 5 – 10 mm
- चौड़ाई: 2 – 4 mm
क्लोरोप्लास्ट की संरचना
द्वि-झिल्ली संरचना
क्लोरोप्लास्ट द्वि-झिल्ली युक्त कोशिकांग हैं।

स्ट्रोमा (Stroma)
परिभाषा
क्लोरोप्लास्ट की आंतरिक झिल्ली से घिरे स्थान को स्ट्रोमा कहते हैं।
कार्य
स्ट्रोमा में निम्न के संश्लेषण हेतु आवश्यक एंजाइम उपस्थित होते हैं:
- कार्बोहाइड्रेट
- प्रोटीन
थायलाकोइड एवं ग्रैना
थायलाकोइड (Thylakoids)
- स्ट्रोमा में अनेक चपटी झिल्लीदार थैलियाँ उपस्थित होती हैं जिन्हें थायलाकोइड कहते हैं।
ग्रैना (Grana)
- थायलाकोइड सिक्कों के ढेर जैसी संरचना में व्यवस्थित रहते हैं।
- इन ढेरों को ग्रैना कहते हैं।
प्रकाश संश्लेषी तंत्र (Photosynthetic Apparatus)
प्रकाश संश्लेषी तंत्र में शामिल हैं:
- प्रकाश संश्लेषी वर्णक
- प्रकाश
प्रकाश संश्लेषी सक्रिय वर्णक
प्रमुख वर्णक
- क्लोरोफिल
- कैरोटेनॉइड
- फाइकोबिलिन (Biliproteins)
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- प्रकाश संश्लेषण मुख्यतः मध्यपर्णी कोशिकाओं में होता है।
- क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण का वास्तविक स्थान है।
- क्लोरोप्लास्ट द्वि-झिल्ली युक्त कोशिकांग हैं।
- स्ट्रोमा में कार्बोहाइड्रेट संश्लेषण के एंजाइम होते हैं।
- थायलाकोइड के ढेर को ग्रैना कहते हैं।
- क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है।
- स्टार्च प्रकाश संश्लेषण का प्रथम दृश्यमान उत्पाद है।
- प्रकाश को ऊर्जा स्रोत के रूप में रॉबर्ट मेयर ने पहचाना।
One-Line NCERT/NEET Facts
- क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
- CO₂ पौधों में कार्बन का स्रोत है।
- क्लोरोप्लास्ट को photosynthetic factory कहा जाता है।
- ग्रैना थायलाकोइड के ढेर होते हैं।
- स्ट्रोमा में एंजाइम पाए जाते हैं।
- क्लोरोफिल एवं कैरोटेनॉइड प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं।
क्लोरोफिल के प्रकार
पादप जगत में क्लोरोफिल के आठ प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं:
- क्लोरोफिल-a
- क्लोरोफिल-b
- क्लोरोफिल-c
- क्लोरोफिल-d
- क्लोरोफिल-e
- बैक्टीरियोक्लोरोफिल-a
- बैक्टीरियोक्लोरोफिल-b
- क्लोरोबियम क्लोरोफिल
प्रकाश संश्लेषी वर्णकों का स्थान
- प्रकाश संश्लेषी वर्णक थायलाकोइड झिल्लियों में पाए जाते हैं।
- ये विशेष क्षेत्रों में स्थित होते हैं जिन्हें क्वांटासोम (Quantasomes) कहते हैं।
क्वांटासोम
- क्वांटासोम शब्द का प्रतिपादन पार्क एवं बिगिन्स ने किया।
क्वांटासोम की संरचना
क्वांटासोम में निम्न पदार्थ पाए जाते हैं:
- क्लोरोफिल-a
- क्लोरोफिल-b
- कैरोटेनॉइड:
- जैंथोफिल
- कैरोटीन
स्थान
- क्वांटासोम मुख्यतः ग्रैना लैमेलाओं में पाए जाते हैं।
क्लोरोफिल
मुख्य प्रकाश संश्लेषी वर्णक
- क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण का मुख्य वर्णक है।
क्लोरोफिल की संरचना
पोर्फाइरिन संरचना
क्लोरोफिल में पोर्फाइरिन संरचना पाई जाती है।
क्लोरोफिल के घटक
- चार पाइरोल वलय मिलकर टेट्रापाइरोल शीर्ष बनाते हैं।
- केंद्र में मैग्नीशियम परमाणु उपस्थित होता है।
- फाइटोल पुच्छ (tail) में अनेक कार्बन परमाणु होते हैं।
क्लोरोफिल-a एवं क्लोरोफिल-b
क्लोरोफिल-a और b में अंतर
| विशेषता | क्लोरोफिल-a | क्लोरोफिल-b |
|---|---|---|
| क्रियात्मक समूह | मिथाइल समूह | फॉर्मिल (CHO) समूह |
| महत्व | मुख्य वर्णक | सहायक वर्णक |
क्लोरोफिल-a एवं b का अनुपात
सामान्यतः क्लोरोफिल-a और b का अनुपात:
- 2.5 – 3.5 : 1
विभिन्न पौधों में अनुपात
| पौधे का प्रकार | क्लोरोफिल-a : b अनुपात |
|---|---|
| सूर्यप्रिय पौधे (Heliophytes) | 5.5 : 1 |
| छायाप्रिय पौधे (Sciophytes) | 1.4 : 1 |
कैरोटेनॉइड
परिभाषा
कैरोटेनॉइड क्लोरोप्लास्ट में उपस्थित सहायक वर्णक हैं।
कार्य
- ये प्रकाश को अवशोषित करके क्लोरोफिल अभिक्रिया केंद्र तक पहुँचाते हैं।
- उच्च तीव्रता वाले प्रकाश से होने वाले प्रकाश-ऑक्सीकरण (Photo-oxidation) से क्लोरोफिल की रक्षा करते हैं।
Shield Pigments
सुरक्षात्मक कार्य के कारण कैरोटेनॉइड को शील्ड पिगमेंट कहा जाता है।
कैरोटेनॉइड द्वारा प्रकाश का अवशोषण
कैरोटेनॉइड मुख्यतः निम्न रंगों के प्रकाश को अवशोषित करते हैं:
- बैंगनी
- जामुनी (Indigo)
- नीला
अधिकतम अवशोषण
- अधिकतम अवशोषण स्पेक्ट्रम के नीले क्षेत्र में होता है।
कैरोटेनॉइड की संरचना
- कैरोटेनॉइड असंतृप्त बहुहाइड्रोकार्बन होते हैं।
- ये आठ आइसोप्रीन (C₅H₈) इकाइयों से बने होते हैं।
कैरोटेनॉइड की विलेयता
- कैरोटेनॉइड वसा में घुलनशील होते हैं।
- इसलिए इन्हें लिपोक्रोम भी कहा जाता है।
कैरोटेनॉइड के प्रकार
कैरोटेनॉइड दो प्रकार के होते हैं:
- कैरोटीन
- जैंथोफिल
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- पादपों में क्लोरोफिल के आठ प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं।
- क्वांटासोम थायलाकोइड झिल्लियों में पाए जाते हैं।
- पार्क एवं बिगिन्स ने क्वांटासोम शब्द दिया।
- क्लोरोफिल में:
- टेट्रापाइरोल शीर्ष
- केंद्रीय मैग्नीशियम
- फाइटोल पुच्छ
उपस्थित होते हैं।
- क्लोरोफिल-b में मिथाइल के स्थान पर CHO समूह होता है।
- कैरोटेनॉइड सहायक वर्णक हैं।
- कैरोटेनॉइड क्लोरोफिल को फोटो-ऑक्सीकरण से बचाते हैं।
- कैरोटेनॉइड का अधिकतम अवशोषण नीले क्षेत्र में होता है।
One-Line NCERT/NEET Facts
- क्लोरोफिल मुख्य प्रकाश संश्लेषी वर्णक है।
- क्वांटासोम ग्रैना लैमेलाओं में पाए जाते हैं।
- क्लोरोफिल में पोर्फाइरिन संरचना होती है।
- कैरोटेनॉइड को शील्ड पिगमेंट कहते हैं।
- कैरोटेनॉइड वसा में घुलनशील होते हैं।
- कैरोटीन एवं जैंथोफिल कैरोटेनॉइड के प्रकार हैं।
कैरोटेनॉइड के प्रकार
कैरोटीन (Carotenes)
- नारंगी से लाल रंग के कैरोटेनॉइड को कैरोटीन कहते हैं।
- कैरोटीन को सबसे पहले गाजर की जड़ों से पृथक किया गया था, इसलिए इन्हें कैरोटीन नाम दिया गया।
लाइकोपीन (Lycopene)
- लाइकोपीन एक लाल वर्णक है।
- यह निम्न में पाया जाता है:
- पका टमाटर
- लाल मिर्च के फल
β-कैरोटीन
- β-कैरोटीन के जल अपघटन से विटामिन-A प्राप्त होता है।
- इसलिए इसे प्रोविटामिन-A कहा जाता है।
जैंथोफिल (Xanthophylls)
परिभाषा
- पीले रंग के कैरोटेनॉइड को जैंथोफिल या कैरोटेनॉल कहते हैं।
प्रमुख जैंथोफिल
- हरे पौधों में सबसे सामान्य जैंथोफिल ल्यूटिन (Lutein) है।
निर्माण
- जैंथोफिल का निर्माण अंधकार में वायवीय परिस्थितियों में होता है।
अनुपात
- युवा पत्तियों में जैंथोफिल एवं कैरोटीन का अनुपात 2 : 1 होता है।
फाइकोबिलिन (Phycobilins)
संरचना
- फाइकोबिलिन में प्रोटीन से जुड़ा पित्त वर्णक (bile pigment) पाया जाता है।
- इनमें रेखीय टेट्रापाइरोल संरचना होती है।
विलेयता
- फाइकोबिलिन जल में घुलनशील वर्णक हैं।
उपस्थिति
- ये मुख्यतः निम्न में पाए जाते हैं:
- लाल शैवाल (Red algae)
- नीलहरित शैवाल (Blue-green algae)
महत्वपूर्ण फाइकोबिलिन
- फाइकोएरिथ्रिन (Phycoerythrin)
- फाइकोसायनिन (Phycocyanin)
Prefix का महत्व
- r → Rhodophyceae (लाल शैवाल)
- c → Cyanophyceae (नीलहरित शैवाल)
प्रकाश एवं फोटॉन
- सूर्य से विद्युतचुंबकीय विकिरण पौधों को फोटॉन के रूप में प्राप्त होता है।
क्वांटम (Quantum)
- ऊर्जा के पैकेट वाले प्रकाश कण (Photon) को क्वांटम (hv) कहते हैं।
विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम
विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में शामिल हैं:
- कॉस्मिक किरणें
- गामा किरणें (γ-rays)
- एक्स-किरणें
- पराबैंगनी किरणें
- दृश्य प्रकाश
- अवरक्त किरणें
- रेडियो तरंगें
दृश्य प्रकाश (Visible Light)
तरंगदैर्ध्य
- दृश्य प्रकाश का परास 350 nm से 750 nm तक होता है।
रंग
दृश्य प्रकाश में 7 रंग होते हैं:
- VIBGYOR
- Violet
- Indigo
- Blue
- Green
- Yellow
- Orange
- Red
पौधों द्वारा प्रकाश का अवशोषण
- पौधे सामान्यतः:
- नीले
- लाल
रंग के प्रकाश को अधिक अवशोषित करते हैं।
ऊर्जा एवं तरंगदैर्ध्य
- प्रकाश की ऊर्जा उसके तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
पत्ती पर प्रकाश का व्यवहार
जब प्रकाश की किरण पत्ती पर गिरती है, तब:
| प्रक्रिया | प्रतिशत |
|---|---|
| परावर्तित (Reflected) | 12% |
| पारित (Transmitted) | 5% |
| अवशोषित (Absorbed) | 83% |
क्लोरोफिल द्वारा अवशोषण
- कुल अवशोषित प्रकाश का केवल 4% भाग क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित किया जाता है।
क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश का अवशोषण
- क्लोरोफिल लाल प्रकाश की तुलना में नीले प्रकाश को अधिक अवशोषित करता है।
अवशोषण स्पेक्ट्रम (Absorption Spectrum)
परिभाषा
विभिन्न तरंगदैर्ध्यों पर क्लोरोफिल-a एवं क्लोरोफिल-b द्वारा प्रकाश अवशोषण को दर्शाने वाले ग्राफ को अवशोषण स्पेक्ट्रम कहते हैं।
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- कैरोटीन नारंगी से लाल रंग के वर्णक हैं।
- लाइकोपीन टमाटर का लाल वर्णक है।
- β-कैरोटीन प्रोविटामिन-A है।
- ल्यूटिन सबसे सामान्य जैंथोफिल है।
- फाइकोबिलिन जल में घुलनशील वर्णक हैं।
- दृश्य प्रकाश 350–750 nm तक होता है।
- पौधे मुख्यतः नीले एवं लाल प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
- प्रकाश की ऊर्जा तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- क्लोरोफिल नीले प्रकाश को अधिक अवशोषित करता है।
One-Line NCERT/NEET Facts
- कैरोटीन गाजर से पृथक किया गया था।
- β-कैरोटीन विटामिन-A का पूर्वरूप है।
- फाइकोसायनिन नीलहरित शैवाल में पाया जाता है।
- दृश्य प्रकाश में VIBGYOR रंग होते हैं।
- कुल प्रकाश का 83% पत्ती द्वारा अवशोषित होता है।
- अवशोषण स्पेक्ट्रम प्रकाश अवशोषण को दर्शाता है।
क्लोरोफिल के अवशोषण शिखर
क्लोरोफिल-a
क्लोरोफिल-a निम्न तरंगदैर्ध्यों पर अधिकतम अवशोषण प्रदर्शित करता है:
- 430 nm
- 662 nm
क्लोरोफिल-b
क्लोरोफिल-b निम्न तरंगदैर्ध्यों पर अधिकतम अवशोषण प्रदर्शित करता है:
- 453 nm
- 642 nm
क्रिया स्पेक्ट्रम (Action Spectrum)
परिभाषा
विभिन्न तरंगदैर्ध्यों पर प्रकाश संश्लेषण की दर को दर्शाने वाले ग्राफ को क्रिया स्पेक्ट्रम कहते हैं।
प्रकाश का परावर्तन एवं अवशोषण
श्वेत रंग का दिखाई देना
- जब कोई पदार्थ विकिरण ऊर्जा को पूर्णतः परावर्तित करता है, तब वह श्वेत दिखाई देता है।
काला या गहरा दिखाई देना
- जब कोई पदार्थ विकिरण ऊर्जा को पूर्णतः अवशोषित कर लेता है और परावर्तित नहीं करता, तब वह गहरा या काला दिखाई देता है।
रंगीन दिखाई देना
- आंशिक रूप से परावर्तित प्रकाश रंगीन दिखाई देता है।
पत्तियों का हरा रंग
- क्लोरोफिल हरे रंग को छोड़कर अन्य सभी रंगों के प्रकाश को अवशोषित कर लेता है।
- हरा प्रकाश परावर्तित होता है।
परिणाम
- क्लोरोफिल युक्त क्लोरोप्लास्ट पौधों के भागों को हरा रंग प्रदान करते हैं।
- इसलिए पत्तियाँ हरी दिखाई देती हैं।
प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की भूमिका
- विकिरण ऊर्जा के अवशोषण के कारण क्लोरोफिल में होने वाला भौतिक परिवर्तन स्ट्रोमा में उपस्थित रासायनिक पदार्थों में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी होता है।
क्लोरोफिल का प्रतिदीप्ति गुण (Fluorescence)
परिभाषा
प्रकाश ऊर्जा प्राप्त कर उत्तेजित अवस्था में पहुँचने के बाद किसी पदार्थ द्वारा तुरंत दीर्घ तरंगदैर्ध्य विकिरण उत्सर्जित करने के गुण को प्रतिदीप्ति कहते हैं।
क्लोरोफिल की प्रतिदीप्ति
- क्लोरोफिल प्रतिदीप्ति प्रदर्शित करता है।
- शुद्ध रूप में पृथक क्लोरोफिल लाल रंग का उत्सर्जन करता है।
- इसलिए क्लोरोफिल लाल प्रतिदीप्ति दर्शाता है।
हरित पौधों में इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण
- हरित पौधों में उत्तेजित इलेक्ट्रॉनों को इलेक्ट्रॉन वाहक ग्रहण कर लेते हैं।
- बाद में ये इलेक्ट्रॉन पुनः क्लोरोफिल को स्थानांतरित कर दिए जाते हैं।
मुक्त ऊर्जा का उपयोग
मुक्त ऊर्जा का उपयोग निम्न के संश्लेषण में होता है:
- ATP
- NADPH + H⁺
क्लोरोफिल की आधार अवस्था
- क्लोरोफिल के इलेक्ट्रॉनों की सामान्य ऊर्जा अवस्था को:
- सिंगलेट अवस्था
- आधार अवस्था (Ground state)
कहते हैं।
फ्रैक्शन-1 प्रोटीन
स्थान
- फ्रैक्शन-1 प्रोटीन स्ट्रोमा में पाया जाता है।
कार्य
- इसमें RuBP कार्बोक्सिलेज एंजाइम उपस्थित होता है।
प्रकाश एवं अंधकार अभिक्रियाओं के स्थान
| अभिक्रिया | स्थान |
|---|---|
| प्रकाश अभिक्रिया | ग्रैना क्षेत्र |
| अंधकार अभिक्रिया | स्ट्रोमा |
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- क्लोरोफिल-a 430 nm एवं 662 nm पर अधिकतम अवशोषण करता है।
- क्लोरोफिल-b 453 nm एवं 642 nm पर अधिकतम अवशोषण करता है।
- क्रिया स्पेक्ट्रम प्रकाश संश्लेषण की दर दर्शाता है।
- पत्तियाँ हरी दिखाई देती हैं क्योंकि क्लोरोफिल हरे प्रकाश को परावर्तित करता है।
- क्लोरोफिल लाल प्रतिदीप्ति दर्शाता है।
- प्रकाश संश्लेषण में ATP एवं NADPH + H⁺ बनते हैं।
- फ्रैक्शन-1 प्रोटीन में RuBP कार्बोक्सिलेज होता है।
- प्रकाश अभिक्रिया ग्रैना में होती है।
- अंधकार अभिक्रिया स्ट्रोमा में होती है।
One-Line NCERT/NEET Facts
- क्लोरोफिल-a मुख्य प्रकाश संश्लेषी वर्णक है।
- क्रिया स्पेक्ट्रम प्रकाश संश्लेषण की सक्रियता दर्शाता है।
- पूर्ण परावर्तन से पदार्थ श्वेत दिखाई देता है।
- पूर्ण अवशोषण से पदार्थ काला दिखाई देता है।
- क्लोरोफिल हरे प्रकाश को परावर्तित करता है।
- क्लोरोफिल प्रतिदीप्ति प्रदर्शित करता है।
- RuBP कार्बोक्सिलेज फ्रैक्शन-1 प्रोटीन में पाया जाता है।
- ग्रैना प्रकाश अभिक्रिया का स्थान है।
वर्णक तंत्र (Pigment Systems)
प्रकाश संश्लेषण में दो वर्णक तंत्र भाग लेते हैं:
- प्रकाश तंत्र-I (Photosystem I / PS I)
- प्रकाश तंत्र-II (Photosystem II / PS II)
प्रकाश तंत्र-I (PS I)
स्थान
- PS I निम्न स्थानों पर पाया जाता है:
- ग्रैना थायलाकोइड के non-appressed भागों की बाहरी सतह पर
- फ्रेट चैनलों में
PS I के घटक
PS I में निम्न उपस्थित होते हैं:
- 200 से 400 क्लोरोफिल अणु
- 50 कैरोटेनॉइड अणु
- एक P700 अणु
रंग
- PS I हल्के हरे रंग का होता है।
PS I के कार्य
- PS I सीधे निम्न में भाग नहीं लेता:
- जल का प्रकाश-ऑक्सीकरण
- आणविक ऑक्सीजन का उत्सर्जन
मुख्य कार्य
- यह एक शक्तिशाली अपचायक उत्पन्न करता है जो NADP⁺ को NADPH में परिवर्तित करता है।
इलेक्ट्रॉन परिवहन
PS I भाग लेता है:
- चक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन
- अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन
अवशोषण सीमा
- PS I के वर्णक अणु 700 nm या उससे कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
प्रकाश तंत्र-II (PS II)
स्थान
- PS II ग्रैना थायलाकोइड के appressed भागों की आंतरिक सतह पर पाया जाता है।
PS II के घटक
PS II में निम्न उपस्थित होते हैं:
- लगभग 200 क्लोरोफिल अणु
- 50 कैरोटेनॉइड अणु
- एक P680 अणु
रंग
- PS II गहरे हरे रंग का होता है।
PS II के कार्य
- PS II सीधे निम्न में भाग लेता है:
- जल का प्रकाश-ऑक्सीकरण
- आणविक ऑक्सीजन का उत्सर्जन
इलेक्ट्रॉन दान
- NADP⁺ के अपचयन के समय PS II, PS I को इलेक्ट्रॉन प्रदान करता है।
इलेक्ट्रॉन परिवहन
PS II केवल निम्न में भाग लेता है:
- अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन
अवशोषण सीमा
- PS II के वर्णक अणु 680 nm या उससे कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
PS I एवं PS II में अंतर
| विशेषता | प्रकाश तंत्र-I (PS I) | प्रकाश तंत्र-II (PS II) |
|---|---|---|
| स्थान | non-appressed ग्रैना की बाहरी सतह | appressed ग्रैना की आंतरिक सतह |
| अभिक्रिया केंद्र | P700 | P680 |
| रंग | हल्का हरा | गहरा हरा |
| जल विखंडन | भाग नहीं लेता | सीधे भाग लेता है |
| ऑक्सीजन उत्सर्जन | प्रत्यक्ष नहीं | प्रत्यक्ष रूप से होता है |
| इलेक्ट्रॉन परिवहन | चक्रीय एवं अचक्रीय | केवल अचक्रीय |
| अवशोषण शिखर | 700 nm | 680 nm |
ताप गुणांक (Q10)
परिभाषा
ताप गुणांक (Q10) किसी विशेष तापमान पर अभिक्रिया की वेग तथा उससे 10°C कम तापमान पर अभिक्रिया की वेग का अनुपात है।
Q10 के मान
भौतिक प्रक्रिया
- Q10 का मान 1 से थोड़ा अधिक होता है।
प्रकाश-रासायनिक अभिक्रिया
- Q10 का मान 1 होता है।
रासायनिक अभिक्रिया
- Q10 का मान 2 या उससे अधिक होता है।
तापमान का प्रभाव
- तापमान में 10°C वृद्धि होने पर रासायनिक अभिक्रिया की दर दोगुनी हो जाती है।
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- PS I में P700 अभिक्रिया केंद्र होता है।
- PS II में P680 अभिक्रिया केंद्र होता है।
- PS I चक्रीय एवं अचक्रीय दोनों इलेक्ट्रॉन परिवहन में भाग लेता है।
- PS II केवल अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन में भाग लेता है।
- जल का विखंडन PS II में होता है।
- ऑक्सीजन उत्सर्जन PS II से संबंधित है।
- PS I, NADP⁺ को NADPH में अपचयित करता है।
- प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए Q10 = 1 होता है।
- रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए Q10 = 2 या अधिक होता है।
One-Line NCERT/NEET Facts
- PS I, 700 nm प्रकाश को अवशोषित करता है।
- PS II, 680 nm प्रकाश को अवशोषित करता है।
- PS II जल के प्रकाशीय अपघटन के लिए उत्तरदायी है।
- P700, PS I का अभिक्रिया केंद्र है।
- P680, PS II का अभिक्रिया केंद्र है।
- चक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन में केवल PS I भाग लेता है।
- अचक्रीय इलेक्ट्रॉन परिवहन में PS I एवं PS II दोनों भाग लेते हैं।
- Q10 अभिक्रिया दर पर तापमान के प्रभाव को दर्शाता है।
प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि
प्रकाश अभिक्रिया (Light Reaction)
परिभाषा
प्रकाश अवस्था की अभिक्रियाएँ प्रकाश पर निर्भर होती हैं, इसलिए इन्हें प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ कहते हैं।
प्रकाश अभिक्रिया की प्रमुख घटनाएँ
प्रकाश अभिक्रिया में निम्न शामिल हैं:
- ऊर्जा का स्थानांतरण
- इमर्सन प्रभाव
- प्रकाश तंत्र-I (PS I)
- प्रकाश तंत्र-II (PS II)
- चक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
- अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
प्रकाश अभिक्रिया के उत्पाद
प्रकाश अभिक्रिया में दो महत्वपूर्ण उत्पाद बनते हैं:
- NADPH
- ATP
प्रकाश अभिक्रिया का स्थान
- प्रकाश अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट के ग्रैना में होती है।
- इसका अवलोकन आर्नन ने किया।
आर्नन के अवलोकन
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
- पृथक क्लोरोप्लास्ट CO₂ का स्थिरीकरण कर सकते हैं।
- इससे कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है।
सीमा
- पृथक क्लोरोप्लास्ट CO₂ का अपचयन नहीं कर सकते क्योंकि CO₂ अपचयन हेतु आवश्यक एंजाइम पृथक्करण के दौरान बाहर निकल जाते हैं।
आवश्यक शर्त
- यदि बाहर निकले पदार्थ पुनः बाहरी रूप से उपलब्ध कराए जाएँ, तो पृथक क्लोरोप्लास्ट CO₂ अपचयन कर सकते हैं।
हिल एवं बेंडाल का सिद्धांत
हिल एवं बेंडाल के अनुसार:
- प्रकाश अभिक्रिया द्वि-चरणीय इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र है।
प्रकाश अभिक्रिया का प्रथम चरण
प्रथम चरण में निम्न प्रक्रियाएँ होती हैं:
- जल का प्रकाशीय अपघटन (Photolysis of water)
- प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
जल का प्रकाशीय अपघटन
परिभाषा
प्रकाश एवं हाइड्रोजन ग्राही की उपस्थिति में क्लोरोफिल द्वारा जल का विखंडन तथा ऑक्सीजन का उत्सर्जन जल का प्रकाशीय अपघटन कहलाता है।
हिल अभिक्रिया
- हिल अभिक्रिया अथवा जल का प्रकाशीय अपघटन रॉबर्ट हिल द्वारा प्रस्तावित किया गया।
हिल ऑक्सीडेंट
परिभाषा
वे इलेक्ट्रॉन या हाइड्रोजन ग्राही जो जल का ऑक्सीकरण करते हैं, हिल ऑक्सीडेंट कहलाते हैं।
उदाहरण
- फेरिडॉक्सिन
- क्विनोन
- 2,6-डाइक्लोरो एंडोफेनोल
- फेरिक लवण (Ferric oxalate)
प्राकृतिक हाइड्रोजन ग्राही
- पौध कोशिकाओं में NADP⁺ प्राकृतिक हाइड्रोजन ग्राही है।
जल से ऑक्सीजन उत्सर्जन का प्रमाण
- रुबेन एवं कामेन (1941) ने रेडियोधर्मी ऑक्सीजन (O¹⁸) का प्रयोग करके प्रमाण दिया कि प्रकाश संश्लेषण में मुक्त होने वाली ऑक्सीजन जल से आती है, CO₂ से नहीं।
प्रकाश संश्लेषण का संशोधित समीकरण
6CO_2 + 6H_2O + \text{Light} + \text{Chlorophyll} \rightarrow C_6H_{12}O_6 + 6O_2
CO₂ अपचयन हेतु प्रयुक्त उत्पाद
प्रकाश अभिक्रिया में बने निम्न उत्पाद CO₂ अपचयन में उपयोग होते हैं:
- ATP
- NADPH + H⁺
प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
परिभाषा
प्रकाश की उपस्थिति में ADP एवं अकार्बनिक फॉस्फेट (Pi) से ATP बनने की प्रक्रिया प्रकाश फॉस्फोराइलेशन कहलाती है।
ADP + P_i \rightarrow ATP
प्रकाश फॉस्फोराइलेशन की क्रियाविधि
- Cytochrome b से Cytochrome f तक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के दौरान विभव प्रवणता के कारण अकार्बनिक फॉस्फेट पायरोफॉस्फेट (~P) में परिवर्तित हो जाता है।
- ADP, Pi के साथ मिलकर ATP बनाता है।
प्रकाश फॉस्फोराइलेशन की खोज
- प्रकाश फॉस्फोराइलेशन की खोज आर्नन ने की।
प्रकाश फॉस्फोराइलेशन के प्रकार
आर्नन ने दो प्रकार बताए:
- चक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
- अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
चक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
विशेषताएँ
- इसमें केवल PS I भाग लेता है।
- यह जल के प्रकाशीय अपघटन से संबंधित नहीं है।
- उत्तेजित इलेक्ट्रॉन पुनः PS I में लौट आते हैं।
- इलेक्ट्रॉन परिवहन चक्रीय होता है।
- केवल ATP का निर्माण होता है।
- यह तब होता है जब NADPH का संचय होने लगता है।
अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन
विशेषताएँ
- इसमें PS I एवं PS II दोनों भाग लेते हैं।
- जल का प्रकाश-ऑक्सीकरण होता है।
- जल टूटकर निम्न बनाता है:
- H⁺
- e⁻
- O₂
इलेक्ट्रॉन प्रवाह
- NADP⁺ का अपचयन PS I द्वारा होता है।
- PS I को इलेक्ट्रॉन PS II प्रदान करता है।
- PS II को इलेक्ट्रॉन जल से प्राप्त होते हैं।
परिणाम
- इलेक्ट्रॉन परिवहन अचक्रीय हो जाता है।
- ATP एवं NADPH बनते हैं।
- यह सामान्य परिस्थितियों में होता है।
NADP⁺ का अपचयन
द्वितीय चरण
प्रकाश अभिक्रिया के दूसरे चरण में:
- NADP⁺ इलेक्ट्रॉनों एवं हाइड्रोजन आयनों से अभिक्रिया करता है।
उत्पाद
- NADPH + H⁺ का निर्माण होता है।
इमर्सन के प्रयोग
- इमर्सन एवं उनके सहयोगियों ने क्लोरेला नामक शैवाल पर प्रयोग किए।
- उन्होंने प्रकाश संश्लेषी उपज (O₂ उत्सर्जन) का अध्ययन किया।
रेड ड्रॉप (Red Drop)
परिभाषा
680 nm से अधिक far-red प्रकाश में प्रकाश संश्लेषी उपज में अचानक कमी को रेड ड्रॉप कहते हैं।
खोज
- रेड ड्रॉप की खोज इमर्सन एवं उनके सहयोगियों ने की।
इमर्सन एन्हांसमेंट प्रभाव
परिभाषा
जब far-red प्रकाश एवं कम तरंगदैर्ध्य वाले लाल प्रकाश को एक साथ दिया जाता है, तब प्रकाश संश्लेषण की दर में वृद्धि होती है। इसे इमर्सन एन्हांसमेंट प्रभाव कहते हैं।
क्वांटम उपज (Quantum Yield)
परिभाषा
प्रति क्वांटम प्रकाश से उत्पन्न ऑक्सीजन अणुओं की संख्या को क्वांटम उपज कहते हैं।
मान
- Quantum yield = 0.125
चक्रीय एवं अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन में अंतर
| विशेषता | चक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन | अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन |
|---|---|---|
| भाग लेने वाला प्रकाश तंत्र | केवल PS I | PS I एवं PS II |
| जल का प्रकाशीय अपघटन | अनुपस्थित | उपस्थित |
| ऑक्सीजन उत्सर्जन | नहीं होता | होता है |
| ATP निर्माण | होता है | होता है |
| NADPH निर्माण | नहीं होता | होता है |
| इलेक्ट्रॉन गति | चक्रीय | अचक्रीय |
NEET त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- प्रकाश अभिक्रिया ग्रैना में होती है।
- प्रकाश अभिक्रिया में ATP एवं NADPH बनते हैं।
- रॉबर्ट हिल ने जल के प्रकाशीय अपघटन का सिद्धांत दिया।
- प्रकाश संश्लेषण में मुक्त ऑक्सीजन जल से आती है।
- प्रकाश फॉस्फोराइलेशन की खोज आर्नन ने की।
- चक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन में केवल PS I भाग लेता है।
- अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोराइलेशन में PS I एवं PS II दोनों भाग लेते हैं।
- 680 nm से ऊपर रेड ड्रॉप होता है।
- इमर्सन प्रभाव प्रकाश संश्लेषी उपज बढ़ाता है।
- क्वांटम उपज का मान 0.125 है।
One-Line NCERT/NEET Facts
- प्रकाश अभिक्रिया एक प्रकाश-रासायनिक अभिक्रिया है।
- NADP⁺ प्राकृतिक हाइड्रोजन ग्राही है।
- प्रकाश में ATP निर्माण को प्रकाश फॉस्फोराइलेशन कहते हैं।
- हिल ऑक्सीडेंट जल का ऑक्सीकरण करते हैं।
- चक्रीय इलेक्ट्रॉन प्रवाह केवल ATP बनाता है।
- अचक्रीय इलेक्ट्रॉन प्रवाह ATP एवं NADPH दोनों बनाता है।
- रेड ड्रॉप की खोज इमर्सन ने की।
- क्लोरेला का उपयोग इमर्सन के प्रयोगों में किया गया।
अंधकार अभिक्रिया (Dark Reaction)
परिभाषा
- अंधकार अभिक्रिया प्रकाश की उपस्थिति में भी हो सकती है, परंतु इसे प्रत्यक्ष रूप से प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती।
- यह प्रकाश अभिक्रिया से प्राप्त आत्मसाती शक्तियों (Assimilatory powers) पर निर्भर करती है।
प्रकृति
- अंधकार अभिक्रिया एक ऊष्मा-रासायनिक अभिक्रिया (Thermochemical reaction) है।
स्थान
- अंधकार अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होती है।
अन्य नाम
- CO₂ स्थिरीकरण
- कार्बन आत्मसात (Carbon assimilation)
अंधकार अभिक्रिया के चरण
अंधकार अभिक्रिया तीन चरणों में पूर्ण होती है:
- कार्बोक्सीलेशन
- अपचयन (Reduction)
- CO₂ ग्राही का पुनर्जनन
प्रकाश-स्वपोषी पौधों के प्रकार
प्रथम स्थायी उत्पाद में कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर पौधों को दो भागों में बाँटा जाता है:
- C₃ पौधे
- C₄ पौधे
कैल्विन चक्र या C₃ मार्ग
खोज
- C₃ पौधों में कार्बन आत्मसात की व्याख्या Melvin Calvin तथा उनके सहयोगियों Benson एवं Bassham ने की।
- प्रयोग निम्न शैवालों पर किए गए:
- Chlorella
- Scenedesmus
- रेडियोधर्मी CO₂ का उपयोग किया गया।
प्रयुक्त तकनीकें
- क्रोमैटोग्राफी
- ऑटोरैडियोग्राफी
नोबेल पुरस्कार
- Melvin Calvin को 1961 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
कैल्विन चक्र के अन्य नाम
- Calvin-Benson cycle
- C₃ pathway
- Reductive pentose phosphate pathway
C₃ पौधे
- जिन पौधों में C₃ मार्ग पाया जाता है उन्हें C₃ पौधे कहते हैं।
चक्रों की संख्या
- एक ग्लूकोज अणु के निर्माण हेतु कैल्विन चक्र 6 बार चलता है।
CO₂ ग्राही
- RuBP (Ribulose bisphosphate), जो 5-कार्बन यौगिक है, CO₂ ग्राही का कार्य करता है।
प्रमुख एंजाइम
- RuBP कार्बोक्सिलेज (RUBISCO) कार्बोक्सीलेशन कराता है।
PGA का निर्माण
- 6 CO₂ अणु, 6 RuBP अणुओं से अभिक्रिया करते हैं।
- एक अस्थायी हेक्सोज यौगिक बनता है।
- यह तुरंत टूटकर:
- 12 PGA (Phosphoglyceric acid) अणु बनाता है।
प्रथम स्थायी उत्पाद
- PGA, C₃ पौधों का प्रथम स्थायी उत्पाद है।
- इसमें 3 कार्बन परमाणु होते हैं।
इसलिए
- इसे C₃ मार्ग कहा जाता है।
अपचयन चरण
PGA का सक्रियण
PGA + ATP \rightarrow DPGA
- 12 PGA अणु, 12 ATP अणुओं से अभिक्रिया कर DPGA बनाते हैं।
एंजाइम
- फॉस्फोग्लिसरिक फॉस्फोट्रांसफेरेज
PGAL / GAP का निर्माण
DPGA + NADPH + H^+ \rightarrow GAP
- DPGA का अपचयन होकर:
- GAP
- 3-PGAL
- G-3-P बनता है।
एंजाइम
- ट्रायोज फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज
ट्रायोज फॉस्फेट
- GAP के 5 अणु DHAP में परिवर्तित होते हैं।
एंजाइम
- ट्रायोज फॉस्फेट आइसोमेरेज
महत्वपूर्ण तथ्य
- PGAL एवं DHAP मिलकर ट्रायोज फॉस्फेट कहलाते हैं।
पुनर्जनन चरण
शुद्ध लाभ
- कुल PGAL का 1/6 भाग हेक्सोज निर्माण में उपयोग होता है।
- 5/6 भाग RuBP पुनर्जनन में उपयोग होता है।
फ्रुक्टोज डाइफॉस्फेट का निर्माण
- छह ट्रायोज अणु संघनित होकर:
- 3 फ्रुक्टोज-1,6-डाइफॉस्फेट अणु बनाते हैं।
एंजाइम
- एल्डोलेज़
फ्रुक्टोज-6-फॉस्फेट का निर्माण
- फ्रुक्टोज डाइफॉस्फेट का डीफॉस्फोरीलेशन होकर फ्रुक्टोज-6-फॉस्फेट बनता है।
एंजाइम
- फ्रुक्टोज फॉस्फेटेज
ग्लूकोज का निर्माण
- एक फ्रुक्टोज फॉस्फेट, प्रतिलोम ग्लाइकोलाइसिस द्वारा ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है।
ग्लूकोज का भाग्य
- ग्लूकोज परिवर्तित होता है:
- सुक्रोज में
- स्टार्च में
RuBP का पुनर्जनन
- शेष फ्रुक्टोज-6-फॉस्फेट अनेक अभिक्रियाओं से गुजरते हैं।
- अंततः:
- 6 राइबुलोज-5-फॉस्फेट अणु बनते हैं।
- ये फॉस्फोरीलेशन द्वारा:
- 6 RuBP अणु बनाते हैं।
एंजाइम
- फॉस्फोपेंटोकाइनेज
ATP आवश्यकता
- 6 ATP उपयोग होते हैं।
कैल्विन चक्र की समग्र अभिक्रिया
6CO_2 + 18ATP + 12NADPH + H^+ \rightarrow C_6H_{12}O_6 + 18ADP + 12NADP^+
ऊर्जा आवश्यकता
एक ग्लूकोज अणु के निर्माण हेतु आवश्यक:
- 6 CO₂
- 18 ATP
- 12 NADPH + H⁺
हैच एवं स्लैक मार्ग (C₄ चक्र)
खोज
- Kortschak एवं सहयोगियों ने गन्ने में C₄ अम्लों का निर्माण देखा।
- बाद में Hatch एवं Slack ने मक्का एवं घासों पर प्रयोग करके इसे सिद्ध किया।
अन्य नाम
- Cooperative photosynthesis
स्थान
- यह निम्न कोशिकाओं में होता है:
- Mesophyll कोशिकाएँ
- Bundle sheath कोशिकाएँ
प्राथमिक CO₂ ग्राही
- PEP (Phosphoenol pyruvic acid)
कार्बोक्सीलेशन एंजाइम
- PEP कार्बोक्सिलेज (PEPcase)
प्रकार
- β-carboxylation
प्रथम स्थायी उत्पाद
- OAA (Oxaloacetic acid)
मैलिक अम्ल का निर्माण
- OAA का अपचयन होकर मैलिक अम्ल बनता है।
एंजाइम
- NADP-विशिष्ट मैलिक डिहाइड्रोजनेज
डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल
निम्न डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल हैं:
- OAA
- मैलिक अम्ल
- एस्पार्टिक अम्ल
मैलिक अम्ल का परिवहन
- मैलिक अम्ल, plasmodesmata द्वारा mesophyll कोशिकाओं से bundle sheath कोशिकाओं में पहुँचता है।
डिकार्बोक्सीलेशन
- मैलिक अम्ल का ऑक्सीडेटिव डिकार्बोक्सीलेशन होता है।
- CO₂ मुक्त होती है।
C₄ पौधों में कैल्विन चक्र
- मुक्त CO₂ को RuBP ग्रहण करता है।
- अतः कैल्विन चक्र bundle sheath क्लोरोप्लास्ट में होता है।
PEP का पुनर्जनन
- पाइरुविक अम्ल पुनः mesophyll कोशिकाओं में जाता है।
- वहाँ यह फॉस्फोरीलेट होकर PEP बनाता है।
एंजाइम
- पाइरुवेट डाइकाइनेज
क्रांज़ संरचना (Kranz Anatomy)
- C₄ पौधों में क्रांज़ संरचना पाई जाती है।
दो प्रकार के क्लोरोप्लास्ट
Mesophyll क्लोरोप्लास्ट
- ग्रैना-समृद्ध
- स्टार्च रहित
Bundle sheath क्लोरोप्लास्ट
- ग्रैना रहित
- स्टार्च-समृद्ध
C₄ पौधों में ऊर्जा आवश्यकता
एक CO₂ अणु के स्थिरीकरण हेतु:
- 5 ATP
- 2 NADPH
आवश्यक होते हैं।
एक ग्लूकोज हेतु
- 30 ATP
- 12 NADPH
आवश्यक होते हैं।
C₄ पौधों के लाभ
- कम CO₂ सांद्रता में भी CO₂ अवशोषित कर सकते हैं।
- रंध्र लगभग बंद होने पर भी उच्च प्रकाश संश्लेषण दर बनाए रखते हैं।
- उष्णकटिबंधीय एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए अनुकूलित हैं।
- फोटोश्वसन नहीं होता।
- C₃ पौधों की तुलना में अधिक दक्ष होते हैं।
CAM मार्ग
पाया जाता है
CAM निम्न कुलों के पौधों में पाया जाता है:
- Crassulaceae
- Cactaceae
- Agavaceae
- Orchidaceae
- Portulacaceae
विशेषता
- दिन में रंध्र बंद रहते हैं।
- रात्रि में रंध्र खुलते हैं।
इसे कहते हैं
- स्कोटोएक्टिव उद्घाटन
CAM पौधे
- ऐसे पौधे CAM पौधे कहलाते हैं।
OAA एवं मैलिक अम्ल निर्माण
- पहले OAA बनता है।
- OAA का अपचयन होकर मैलिक अम्ल बनता है।
- मैलिक अम्ल रिक्तिकाओं में संचित होता है।
अम्लीकरण (Acidification)
परिभाषा
- रात्रि में CO₂ अवशोषण एवं मैलिक अम्ल के रूप में संचयन को अम्लीकरण कहते हैं।
विम्लीकरण (Deacidification)
परिभाषा
- दिन में मैलिक अम्ल से CO₂ मुक्त होना विम्लीकरण कहलाता है।
CAM अभिक्रियाओं का स्थान
- सभी CAM अभिक्रियाएँ mesophyll कोशिकाओं में होती हैं।
- Bundle sheath क्लोरोप्लास्ट अनुपस्थित होते हैं।
CAM का महत्व
- यह रसीले पौधों के जीवित रहने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रकाश संश्लेषी कारक
न्यूनतम नियम
- इसका प्रतिपादन Justus von Liebig ने 1843 में किया।
सीमित कारक नियम
- इसका प्रतिपादन Frederick Frost Blackman ने 1905 में किया।
परिभाषा
जब कोई प्रक्रिया अनेक कारकों पर निर्भर करती है, तब उसकी दर सबसे धीमे कारक द्वारा नियंत्रित होती है।
सीमित कारक
- जो कारक न्यूनतम स्तर पर होता है उसे सीमित कारक कहते हैं।
कारकों के प्रकार
बाह्य कारक
- प्रकाश
- CO₂ सांद्रता
- O₂ सांद्रता
- तापमान
- जल
- खनिज लवण
आंतरिक कारक
- क्लोरोफिल मात्रा
- कार्बोहाइड्रेट संचय
- रंध्रों का खुलना
क्षतिपूर्ति बिंदु
- वह प्रकाश तीव्रता जहाँ प्रकाश संश्लेषण एवं श्वसन की दर समान हो, क्षतिपूर्ति बिंदु कहलाती है।
फोटो-ऑक्सीकरण एवं सोलराइजेशन
फोटो-ऑक्सीकरण
- अधिक प्रकाश तीव्रता से क्लोरोफिल का विनाश।
सोलराइजेशन
- अत्यधिक तीव्र प्रकाश से होने वाला तीव्र फोटो-ऑक्सीकरण।
प्रकाश के रंग का प्रभाव
| प्रकाश | प्रकाश संश्लेषण दर |
|---|---|
| लाल | अधिकतम |
| नीला | उच्च |
| हरा | न्यूनतम |
सायोफाइट एवं हीलियोफाइट
सायोफाइट
- छाया में उगने वाले पौधे
हीलियोफाइट
- प्रत्यक्ष सूर्य प्रकाश में उगने वाले पौधे
CO₂ का प्रभाव
- CO₂ को 0.03% से 1% तक बढ़ाने पर प्रकाश संश्लेषण बढ़ता है।
- 1% से अधिक होने पर रंध्र बंद होने लगते हैं और दर घटती है।
सबसे सामान्य सीमित कारक
- CO₂ सबसे सामान्य सीमित कारक है।
- प्रकाश दूसरा महत्वपूर्ण कारक है।
वारबर्ग प्रभाव
परिभाषा
- O₂ द्वारा प्रकाश संश्लेषण दर में कमी को वारबर्ग प्रभाव कहते हैं।
तापमान का प्रभाव
- तापमान मुख्यतः अंधकार अभिक्रिया को प्रभावित करता है।
- 0°C से 35°C तक Q10 = 2 होता है।
जल की भूमिका
- जल प्रदान करता है:
- इलेक्ट्रॉन
- H⁺ आयन
खनिजों की भूमिका
| तत्व | कार्य |
|---|---|
| Mg | क्लोरोफिल संश्लेषण |
| Fe | फेरिडॉक्सिन में |
| Cu | प्लास्टोसाइनिन में |
| Mn²⁺, Cl⁻ | जल का प्रकाशीय अपघटन |
एल्बिनो पौधे
- क्लोरोफिल रहित उत्परिवर्ती पौधे एल्बिनो कहलाते हैं।
- ये लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकते।
महत्वपूर्ण प्रयोग
| आवश्यकता | प्रयोग |
|---|---|
| CO₂ की आवश्यकता | Moll’s half-leaf experiment |
| प्रकाश की आवश्यकता | Light screen experiment |
| क्लोरोफिल की आवश्यकता | Croton leaf experiment |
| O₂ उत्सर्जन | Hydrilla funnel experiment |
स्टार्च परीक्षण
- स्टार्च की उपस्थिति का परीक्षण आयोडीन परीक्षण द्वारा किया जाता है।
- स्टार्च प्रकाश संश्लेषी उत्पाद का परासरणीय निष्क्रिय रूप है।
प्रकाश संश्लेषण का महत्व (Importance of Photosynthesis)
प्रकाश संश्लेषण का मूल महत्व
- प्रकाश संश्लेषण हरे पौधों में होने वाली मूल संश्लेषणात्मक प्रक्रिया है।
- यह एक उपचयी (Anabolic) अथवा रचनात्मक प्रक्रिया है।
भोजन एवं ऊर्जा का स्रोत
- सभी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भोजन एवं ऊर्जा के लिए प्रकाश संश्लेषण पर निर्भर हैं।
वायुमंडलीय ऑक्सीजन का स्रोत
- वायुमंडल की संपूर्ण ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण से प्राप्त होती है।
- यह ऑक्सीजन जीवों के श्वसन में उपयोगी होती है।
वायुमंडलीय संतुलन बनाए रखना
- प्रकाश संश्लेषण वायुमंडल में O₂ तथा CO₂ की मात्रा को स्थिर बनाए रखने में सहायक है।
प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण
- यह एकमात्र जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें:
- प्रकाश ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा
- रासायनिक ऊर्जा → कार्बोहाइड्रेट में स्थितिज ऊर्जा
में परिवर्तित होती है।
ओज़ोन परत निर्माण में भूमिका
- प्रकाश संश्लेषण से मुक्त O₃ बाह्य वायुमंडल में ओज़ोन परत के निर्माण में उपयोगी होता है।
- ओज़ोन परत हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है।
कार्बोहाइड्रेट का उपयोग
प्रकाश संश्लेषण से बने कार्बोहाइड्रेट निम्न पदार्थों के संश्लेषण में उपयोग होते हैं:
- कार्बनिक अम्ल
- प्रोटीन
- वसा
- न्यूक्लिक अम्ल
- हार्मोन
- वर्णक
- विटामिन
- एल्कलॉइड
- अन्य उपापचयी पदार्थ
वायुमंडल का शुद्धिकरण
- प्रकाश संश्लेषण वायुमंडलीय CO₂ का उपयोग करता है।
- CO₂ जीवों के श्वसन एवं ईंधनों के दहन से लगातार वायुमंडल में जुड़ती रहती है।
- अतः प्रकाश संश्लेषण वायुमंडल को शुद्ध करने का कार्य करता है।
प्रकाश-श्वसन (Photorespiration)
परिभाषा
- अंधकार अवस्था के C₂ यौगिक (ग्लाइकोलिक अम्ल) से प्रकाश प्रेरित CO₂ मुक्त होना प्रकाश-श्वसन कहलाता है।
प्रकाश-श्वसन का स्थान
- प्रकाश-श्वसन केवल हरी कोशिकाओं में होता है।
C₃ एवं C₄ पौधों में स्थिति
| पौधे | प्रकाश-श्वसन |
|---|---|
| C₃ पौधे | उपस्थित |
| C₄ पौधे | अनुपस्थित |
सम्मिलित कोशिकांग
प्रकाश-श्वसन में तीन कोशिकांग भाग लेते हैं:
- पेरॉक्सीसोम
- क्लोरोप्लास्ट
- माइटोकॉन्ड्रिया
प्रकाश-श्वसन का प्रभाव
- इस प्रक्रिया में ATP एवं NADPH का निर्माण नहीं होता।
- इसलिए इसे प्रकाश संश्लेषण के परिणाम को कम करने वाली प्रक्रिया माना जाता है।
कार्बन की हानि
- प्रकाश-श्वसन के दौरान CO₂ के रूप में कार्बन की हानि होती है।
RuBP ऑक्सीजनेज़ क्रिया
- जब O₂ की सांद्रता CO₂ से अधिक हो जाती है, तब RuBP ऑक्सीजनेज़, RuBP के साथ O₂ को जोड़ता है।
बनने वाले उत्पाद
RuBP से बनते हैं:
- PGA का एक अणु
- फॉस्फोग्लाइकोलिक अम्ल का एक अणु
ग्लाइकोलिक अम्ल का निर्माण
- फॉस्फोग्लाइकोलिक अम्ल का डीफॉस्फोरीलेशन होकर ग्लाइकोलिक अम्ल बनता है।
पेरॉक्सीसोम में अभिक्रिया
- ग्लाइकोलिक अम्ल पेरॉक्सीसोम में प्रवेश करता है।
- यह प्रकाश-श्वसन का सब्सट्रेट बनता है।
ग्लाइकोलिक अम्ल का ऑक्सीकरण
Glycolic Acid -> Glyoxylic Acid + H2O2
एंजाइम
- Glycolic oxidase
H₂O₂ का विघटन
2H2O2 -> 2H2O + O2
एंजाइम
- Catalase
ग्लाइसिन का निर्माण
- Glyoxylic acid का ट्रांसएमिनेशन होकर glycine बनता है।
एंजाइम
- Glyoxylate aminotransferase
माइटोकॉन्ड्रिया में अभिक्रिया
- Glycine माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश करता है।
अभिक्रिया
- दो glycine अणु मिलकर:
- एक serine
- CO₂
- NH₃
बनाते हैं।
एंजाइम
- Glycine decarboxylase
CO₂ मुक्त होना
- माइटोकॉन्ड्रिया में glycine से serine बनने के दौरान CO₂ मुक्त होती है।
Hydroxypyruvate एवं Glyceric Acid का निर्माण
- Serine का डीएमिनेशन होकर hydroxypyruvate बनता है।
- इसके साथ glyceric acid भी बनता है।
ग्लाइकोलेट मार्ग (Glycolate Pathway)
- प्रकाश-श्वसन को glycolate pathway भी कहते हैं।
- Glycolic acid जैसे दो-कार्बन यौगिक से PGA बनने की प्रक्रिया glycolate pathway कहलाती है।
PGA का पुनर्निर्माण
- Glyceric acid पेरॉक्सीसोम से क्लोरोप्लास्ट में पहुँचता है।
- वहाँ ATP की सहायता से 3-PGA बनाता है।
Glyceric\ Acid + ATP \rightarrow 3PGA
PGA का उपयोग
- 3-PGA प्रकाश संश्लेषण के कार्बन अपचयन चक्र में उपयोग होता है।
NEET Quick Revision Points
- प्रकाश संश्लेषण एक उपचयी प्रक्रिया है।
- संपूर्ण वायुमंडलीय O₂ प्रकाश संश्लेषण से प्राप्त होती है।
- प्रकाश संश्लेषण वायुमंडलीय CO₂ को कम करता है।
- ओज़ोन परत UV किरणों से रक्षा करती है।
- प्रकाश-श्वसन केवल C₃ पौधों में होता है।
- C₄ पौधों में प्रकाश-श्वसन अनुपस्थित होता है।
- प्रकाश-श्वसन में पेरॉक्सीसोम, क्लोरोप्लास्ट एवं माइटोकॉन्ड्रिया भाग लेते हैं।
- प्रकाश-श्वसन में ATP एवं NADPH नहीं बनते।
- Glycolic oxidase एवं catalase महत्वपूर्ण एंजाइम हैं।
- Glycolate pathway प्रकाश-श्वसन का दूसरा नाम है।


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